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पंजाब, भारत का एक प्रमुख कृषि राज्य, हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस बाढ़ ने लगभग 12 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पंजाब, जो देश के कुल गेहूं उत्पादन का 20% और चावल उत्पादन का 12% योगदान देता है, अब इस आपदा के कारण गहरे संकट में है।
बाढ़ की वर्तमान स्थिति और प्रभाव
पंजाब के सभी 23 जिले बाढ़ प्रभावित घोषित किए गए हैं, जिसमें 1902 गांव जलमग्न हो चुके हैं और 3.8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इस आपदा में 43 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11.7 लाख हेक्टेयर खेती की जमीन बर्बाद हो गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिला गुरदासपुर है, जहां 329 गांव और 1.45 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, और 400 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब गई है। अन्य प्रभावित जिलों में कपूरथला, तरन-तारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, होशियारपुर, लुधियाना, जालंधर, रूपनगर, शहीद भगत सिंह नगर, और मोगा शामिल हैं।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जहां 43 लोगों की मौत और 9 लाख से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ है।
बाढ़ के कारण: प्राकृतिक और मानव जनित
प्राकृतिक कारण: पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में इस साल 45% अधिक बारिश दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा के कारण ब्यास नदी में पानी का प्रवाह 500 से 55,000 क्यूसेक तक पहुंच गया। एक क्यूसेक का अर्थ है एक घन फुट प्रति सेकंड, यानी 28.317 लीटर पानी प्रति सेकंड। इसके अलावा, 26 अगस्त को रावी नदी पर माधोपुर बैराज के दो गेट टूटने से 2 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का प्रवाह हुआ, जिसके कारण मालवा क्षेत्र में भारी जलभराव देखा गया।
मानव जनित कारण: बांधों का कुप्रबंधन इस बाढ़ का एक प्रमुख कारण रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई-अगस्त में बांधों में सर्दियों के लिए पानी आरक्षित करने के चक्कर में अत्यधिक पानी रोका जाता है, जिसे बाद में बिना चेतावनी के छोड़ दिया जाता है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ आ जाती है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) पर आरोप है कि उसने जलाशयों में अत्यधिक पानी रोका और फिर उसे अचानक छोड़ा, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। 26 अगस्त को रणजीत सागर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण माधोपुर बैराज टूट गया, जिससे रावी नदी में बाढ़ आ गई।
इसके अलावा, धसी बांधों की कमजोरी और अवैध खनन ने भी स्थिति को और गंभीर बनाया। सरकार पर आरोप है कि वह बाढ़ के बाद ही सक्रिय होती है, जबकि रोकथाम के लिए पहले से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
पंजाब की भौगोलिक स्थिति और नदियाँ
पंजाब का नाम “पंच आब” (पांच नदियों का पानी) से आया है। वर्तमान में भारतीय पंजाब में रावी, ब्यास, सतलुज और एक मौसमी नदी घग्गर बहती हैं। इन नदियों द्वारा लाई गई गाद के कारण पंजाब का क्षेत्र दुनिया के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है। हालांकि, भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण ये नदियाँ बाढ़ का कारण बन रही हैं।
बांधों की भूमिका और विवाद
पंजाब और हिमाचल प्रदेश में तीन प्रमुख बांध हैं: भाखड़ा बांध (सतलुज नदी), पोंग बांध (ब्यास नदी), और रणजीत सागर बांध (रावी नदी)। इनका उद्देश्य सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए पानी आरक्षित करना है, लेकिन भारी बारिश के समय जलाशयों से पानी छोड़ना अनिवार्य हो जाता है, जो निचले क्षेत्रों में बाढ़ का कारण बनता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बांधों का प्रबंधन पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए, साथ ही एक प्रभावी चेतावनी प्रणाली भी जरूरी है।
निष्कर्ष
पंजाब में आई इस बाढ़ ने न केवल लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा किया है। प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानव जनित लापरवाही, जैसे बांधों का कुप्रबंधन और कमजोर बुनियादी ढांचा, इस आपदा को और गंभीर बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए सरकार को बांध प्रबंधन, बाढ़ रोकथाम और चेतावनी प्रणालियों पर गंभीरता से काम करना होगा।