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नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन: भारत की आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की ओर एक कदम
भारत सरकार ने हाल ही में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) की शुरुआत की है, जो देश को महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह मिशन भारत के हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया है। इस लेख में हम इस मिशन के उद्देश्यों, महत्व, और इसके साथ जुड़े विवादों पर प्रकाश डालेंगे।
नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का उद्देश्य
NCMM का मुख्य लक्ष्य महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। ये खनिज, जैसे लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, न्यूबियम, टाइटेनियम आदि, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर पैनलों, रक्षा उपकरणों और स्मार्टफोन्स जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत वर्तमान में इन खनिजों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, खासकर चीन जैसे देशों पर। इस निर्भरता को कम करने और वैश्विक आपूर्ति संकटों से बचने के लिए NCMM की शुरुआत जनवरी 2025 में की गई।
इस मिशन के तहत 2025 से 2031 तक 16,300 करोड़ रुपये का निवेश और 18,000 करोड़ रुपये का सार्वजनिक क्षेत्र निवेश किया जाएगा। इसके अलावा, 1200 अन्वेषण परियोजनाएं, सात उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, और 1000 पेटेंट प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 1500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक कचरे और बैटरी स्क्रैप से खनिजों का पुनर्चक्रण बढ़ाया जाएगा, जिससे 270 किलोटन वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता और 40 किलोटन खनिज उत्पादन का लक्ष्य है। इससे 8,000 करोड़ रुपये के निवेश और 70,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
क्रिटिकल और रणनीतिक खनिजों का महत्व
क्रिटिकल खनिज वे हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति जोखिम भरी है। उदाहरण के लिए, लिथियम और कोबाल्ट का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी भंडारण में होता है, जबकि रेयर अर्थ एलिमेंट्स रक्षा उपकरणों, राडार, और उच्च तकनीकी प्रणालियों में महत्वपूर्ण हैं। भारत ने 2023 में 30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची जारी की थी, जिसमें थोरियम, यूरेनियम, और मोनाजाइट जैसे परमाणु खनिज भी शामिल हैं।
रणनीतिक खनिज, जैसे प्लैटिनम और बेरिलियम, रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए अनिवार्य हैं। भारत का लक्ष्य 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए क्रिटिकल खनिजों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
खनन परियोजनाओं को सार्वजनिक परामर्श से छूट
NCMM के तहत सरकार ने परमाणु, क्रिटिकल, और रणनीतिक खनिजों से जुड़ी खनन परियोजनाओं को सार्वजनिक परामर्श से छूट देने का फैसला लिया है। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लिया गया, ताकि इन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सके। पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) नोटिफिकेशन 2006 के तहत रक्षा और सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं को ऐसी छूट देने का प्रावधान है।
रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा विभाग ने इन खनिजों के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया है। उदाहरण के लिए, थोरियम भारत के तीसरे चरण के परमाणु कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग रक्षा उपकरणों में होता है। इन खनिजों के भंडार सीमित होने और वैश्विक आपूर्ति पर निर्भरता के कारण, सरकार ने परिवेश (PARIVESH) ऑनलाइन पोर्टल पर इन परियोजनाओं के लिए अलग श्रेणी बनाई और माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट रेगुलेशन एक्ट 2023 में संशोधन कर खनन प्रक्रिया को तेज किया।
पर्यावरणविदों की चिंताएं
इस फैसले पर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक परामर्श के बिना खनन परियोजनाओं का पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाला प्रभाव ठीक से आंका नहीं जा सकेगा। खनन से पर्यावरणीय क्षति और स्थानीय समुदायों की आजीविका पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। सरकार को इन चिंताओं का समाधान करना होगा ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बना रहे।