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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि राज्य अब भारत का चौथा पूर्ण साक्षर राज्य बन चुका है, जहां साक्षरता दर 99.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि पूरे देश के साक्षरता अभियान को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली है।
मुख्यमंत्री ने शिमला के पीटरहॉफ स्थित ‘उल्लास मेला 2025’ कार्यक्रम में इसकी औपचारिक घोषणा की। उन्होंने कहा, “आजादी के समय हिमाचल की साक्षरता दर महज 7 प्रतिशत थी, जब देश निरक्षरता के अंधेरे में डूबा हुआ था। 78 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद हम पूर्ण साक्षर राज्य का सम्मान हासिल कर चुके हैं। यह सफलता हमारे उन निरक्षर भाइयों-बहनों की देन है, जिन्होंने खुद को साक्षर बनाया।” शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इसे ‘हिमाचल के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय’ करार देते हुए कहा कि राज्य ने केंद्र के मानदंडों को पार कर यह मुकाम हासिल किया है।
पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची: कौन हैं शीर्ष पर?
केंद्र सरकार के अनुसार, 95 प्रतिशत से अधिक साक्षरता दर वाले राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण साक्षर माना जाता है। शिक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में इसकी नई परिभाषा जारी की, जिसमें 100 प्रतिशत साक्षरता को अव्यावहारिक मानते हुए 95-100 प्रतिशत की सीमा तय की गई। हिमाचल प्रदेश के साथ अब भारत में पांच पूर्ण साक्षर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश हैं। एक नजर डालें:
- गोवा (साक्षरता दर: 99.72 प्रतिशत) – देश का नंबर वन।
- लद्दाख – केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अग्रणी।
- मिजोरम – पूर्वोत्तर का साक्षरता चैंपियन।
- त्रिपुरा (साक्षरता दर: 95.6 प्रतिशत) – हालिया प्रगति के साथ शामिल।
- हिमाचल प्रदेश (साक्षरता दर: 99.3 प्रतिशत) – नवीनतम सदस्य।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वीडियो संदेश में सभी को बधाई दी और कहा, “यह उपलब्धि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” मई 2025 में मिजोरम पहला पूर्ण साक्षर राज्य बना था, उसके बाद गोवा और त्रिपुरा ने जगह बनाई।
साक्षरता का वास्तविक अर्थ: पढ़ाई से आगे जीवन कौशल
पूर्ण साक्षरता सिर्फ अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, साक्षर व्यक्ति वह है जो न केवल पढ़-लिख सके, बल्कि समझ सके, गणना कर सके और डिजिटल दुनिया में पारंगत हो। इसमें जोड़-घटाव-गुणा-भाग जैसी बुनियादी गणित, समय-तिथि की समझ, चेक-मुद्रा का उपयोग और यूपीआई जैसे डिजिटल लेनदेन शामिल हैं। हिमाचल की कुल आबादी करीब 75 लाख होने पर भी अब केवल 56,960 व्यक्ति निरक्षर बचे हैं, जिससे साक्षरता दर 99.3 प्रतिशत हो गई।
2011 की जनगणना में हिमाचल की साक्षरता दर 82.8 प्रतिशत थी, जिसमें पुरुषों की 89.53 प्रतिशत और महिलाओं की 75.93 प्रतिशत दर दर्ज हुई। राष्ट्रीय औसत उस समय 74 प्रतिशत था। हालिया पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 के अनुसार, भारत की कुल साक्षरता दर (7 वर्ष से ऊपर) 80.9 प्रतिशत है। हिमाचल ने ड्रॉपआउट रेट को लगभग शून्य कर दिया है और छात्र-अध्यापक अनुपात में देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।
उल्लास कार्यक्रम: साक्षरता क्रांति का आधार
इस सफलता का मुख्य श्रेय ‘उल्लास’ (ULLAS) कार्यक्रम को जाता है, जिसकी शुरुआत 2022 में शिक्षा मंत्रालय ने की। इसका पूरा नाम ‘अंडरस्टैंडिंग लाइफ लॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी’ है, जो हर उम्र के लोगों को आजीवन शिक्षा का मौका देता है। कार्यक्रम का लक्ष्य 15 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों को औपचारिक शिक्षा से वंचित न रखना है।
उल्लास के तहत घर-घर सर्वे से निरक्षरों की पहचान होती है, फिर उन्हें बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद ‘एफएल नेट’ (FLNET) परीक्षा दी जाती है, जिसे पास करने पर NIOS से फाउंडेशनल लिटरेसी सर्टिफिकेट मिलता है। हिमाचल में 42,578 लोग नव-साक्षर बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह यात्रा चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अब हम गुणवत्ता शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करेंगे।”
आगे की चुनौतियां: साक्षरता से आत्मनिर्भरता तक
मुख्यमंत्री सुक्खू ने जोर दिया कि पूर्ण साक्षरता यहां रुकावट नहीं बनेगी। राज्य अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर फोकस करेगा, ताकि हर नागरिक आत्मनिर्भर हो सके। शिक्षा विभाग ने मंत्रालय को आंकड़ों की पुष्टि भेजी है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा, “हिमाचल की प्रगति दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प से असंभव संभव होता है।”
राज्यवासी इस ऐतिहासिक क्षण का उत्सव मना रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ लिंग असमानता और ग्रामीण क्षेत्रों पर अधिक ध्यान की सलाह दे रहे हैं। एक साक्षर हिमाचल ही विकसित भारत की नींव मजबूत करेगा।