केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) लागू किया है। यह योजना न्यू पेंशन सिस्टम (NPS) का विकल्प है और पुरानी पेंशन सिस्टम (OPS) की कुछ खासियतों को शामिल करती है। हालांकि, कर्मचारियों में इसे अपनाने का उत्साह कम दिख रहा है। आइए, आसान भाषा में समझें कि UPS क्या है और यह कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।
UPS क्या है?
यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) एक ऐसी पेंशन योजना है जो पुरानी पेंशन सिस्टम (OPS) और न्यू पेंशन सिस्टम (NPS) का मिश्रण है। यह उन कर्मचारियों के लिए लाई गई है जो NPS में हैं और इसे चुनने का विकल्प दिया गया है। यह अनिवार्य नहीं है, यानी कर्मचारी चाहें तो NPS में ही रह सकते हैं। सरकार ने UPS चुनने की समय सीमा को 30 सितंबर 2025 तक बढ़ा दिया है।
कर्मचारियों में क्यों कम रुचि?
केंद्र सरकार के करीब 24 लाख कर्मचारी NPS में हैं, लेकिन अब तक केवल 4,000 ने ही UPS को चुना है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन सिस्टम (OPS) की मांग कर रहे हैं, जिसमें सरकार पूरी पेंशन देती थी और कर्मचारियों को कोई योगदान नहीं करना पड़ता था। कर्मचारियों को लगता है कि UPS, OPS जितना फायदेमंद नहीं है।
UPS की खास बातें
- गारंटीड पेंशन:
- अगर कर्मचारी ने 25 साल या उससे ज्यादा नौकरी की है, तो उसे आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% पेंशन मिलेगी।
- 10 साल की नौकरी करने वाले को कम से कम 10,000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी।
- कर्मचारी की मृत्यु के बाद, उसके परिवार को पेंशन का 60% मिलेगा।
- महंगाई को ध्यान में रखते हुए पेंशन में महंगाई भत्ता (DA) जोड़ा जाएगा।
- एकमुश्त राशि:
- रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी के अलावा कर्मचारी को एकमुश्त राशि भी मिलेगी।
- यह राशि हर 6 महीने की नौकरी के लिए आखिरी वेतन (मूल वेतन + DA) का 1/10वां हिस्सा होगी।
- उदाहरण: अगर आखिरी वेतन 60,000 रुपये है और कर्मचारी ने 30 साल 6 महीने नौकरी की, तो उसे 3,66,000 रुपये की एकमुश्त राशि मिलेगी।
- योगदान:
- कर्मचारी और सरकार दोनों को मूल वेतन और DA का 10% योगदान देना होगा।
- इसके अलावा, सरकार 8.5% का अतिरिक्त योगदान एक विशेष UPS पूल में करेगी, जो पेंशन की गारंटी के लिए इस्तेमाल होगा।
- विकल्प:
- कर्मचारी एक बार UPS चुनने के बाद NPS में वापस जा सकता है, लेकिन यह विकल्प केवल एक बार मिलेगा।
- यह विकल्प रिटायरमेंट से 1 साल पहले या स्वैच्छिक रिटायरमेंट के 3 महीने पहले तक उपलब्ध है।
- अगर कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाता है, तो उसे UPS का लाभ नहीं मिलेगा।
OPS और NPS से तुलना
- पुरानी पेंशन सिस्टम (OPS):
यह 2004 से पहले की योजना थी, जिसमें कर्मचारी को कोई योगदान नहीं देना पड़ता था और सरकार पूरी पेंशन देती थी। यह गारंटीड थी, लेकिन सरकार पर आर्थिक बोझ ज्यादा पड़ता था। - न्यू पेंशन सिस्टम (NPS):
यह 2004 से लागू हुआ और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य था। इसमें कर्मचारी 10% और सरकार 14% योगदान देती थी। पैसा शेयर बाजार, बॉन्ड या सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाता था, लेकिन पेंशन की कोई गारंटी नहीं थी। इसीलिए कर्मचारी इससे नाखुश थे।
सरकार का लक्ष्य और चुनौतियां
UPS के जरिए सरकार कर्मचारियों को गारंटीड पेंशन देकर उनकी नाराजगी कम करना चाहती है, साथ ही NPS की तरह योगदान प्रणाली रखकर आर्थिक बोझ को भी नियंत्रित करना चाहती है। लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने चेतावनी दी है कि अगर सभी राज्य OPS की ओर लौटते हैं, तो आर्थिक बोझ 4.5 गुना बढ़ सकता है और 2060 तक यह GDP का 0.9% हो सकता है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि UPS, OPS का पूरी तरह विकल्प नहीं है। उनकी मांग है कि सरकार OPS को फिर से लागू करे। दूसरी ओर, सरकार UPS को एक संतुलित समाधान के रूप में पेश कर रही है। अब देखना यह है कि 30 सितंबर 2025 तक कितने कर्मचारी UPS को अपनाते हैं या उनकी मांगें और तेज होती हैं।