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भारत ने अपने इतिहास में पहली बार इतना बड़ा व्यापार घाटा देखा है। अक्टूबर 2025 में देश का व्यापार घाटा लगभग 41.68 अरब डॉलर (लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए) तक पहुँच गया। मतलब साफ है — हमने विदेश से बहुत ज्यादा सामान मँगाया, लेकिन अपना सामान बाहर कम बेच पाए।
क्या हुआ अक्टूबर में?
- निर्यात (Export): पिछले साल के मुकाबले 11.8% गिरा → सिर्फ 34.38 अरब डॉलर का सामान बाहर बेचा।
- आयात (Import): 16% से ज्यादा बढ़ा → कुल 76.06 अरब डॉलर का सामान देश में आया।
- नतीजा → घाटा बना 41.68 अरब डॉलर (पहले कभी इतना नहीं हुआ)।
सबसे बड़ा विलेन कौन? — सोना-चाँदी!
- इस बार सोने का आयात तीन गुना हो गया:
- पिछले साल अक्टूबर: 4.92 अरब डॉलर
- इस बार अक्टूबर: 14.72 अरब डॉलर (200% से ज्यादा बढ़ोतरी)
- चाँदी का आयात तो 500% से भी ज्यादा बढ़ गया!
- त्योहारों का सीजन और शादी-ब्याह की वजह से लोग खूब सोना-चाँदी खरीद रहे हैं।
अच्छी खबर भी है
- कच्चा तेल (Crude Oil) का आयात थोड़ा कम हुआ (15.8 से 14.8 अरब डॉलर)।
- यानी तेल महँगा होने के बावजूद हमने थोड़ा कम तेल मँगाया।
निर्यात क्यों गिरा?
- इंजीनियरिंग सामान 16% कम बिका।
- ज्वेलरी निर्यात 29.5% तक गिरा।
- अमेरिका ने नए टैरिफ लगाए, जिससे वहाँ निर्यात 8.6% कम हुआ (हालाँकि 40-50% की डर से कम नुकसान हुआ)।
- सरकार का कहना है — पिछले साल अक्टूबर में निर्यात बहुत ज्यादा था, इसलिए इस बार प्रतिशत में ज्यादा गिरावट दिख रही है (Base Effect)।
इससे क्या खतरा है?
- ज्यादा डॉलर बाहर जा रहा है → रुपये पर दबाव बढ़ेगा।
- विदेशी मुद्रा भंडार पहले ही 687 अरब डॉलर तक नीचे आ गया है।
- अगर प्रवासी भारतीयों का पैसा (Remittance) और विदेशी निवेश नहीं बढ़ा तो मुश्किल होगी।
- सबसे बड़ी चिंता — हम सोना जैसे “गैर-उत्पादक” सामान ज्यादा मँगा रहे हैं, जिससे फैक्ट्री-उद्योग को फायदा नहीं होता।
अभी पूरा साल कैसा चल रहा है?
अप्रैल से अक्टूबर तक:
- निर्यात: सिर्फ 0.63% बढ़ा
- आयात: 6% बढ़ा
→ यानी पूरा साल अभी तक ठीक-ठाक था, लेकिन अक्टूबर ने सारा खेल बिगाड़ दिया।
आगे क्या देखना है?
- नवंबर-दिसंबर में त्योहार खत्म, क्या सोने का आयात कम होगा?
- दुनिया में माँग बढ़ेगी या नहीं?
- भारत की IT सर्विसेज और प्रवासी भारतीयों का पैसा अच्छा रहा तो कुछ राहत मिल सकती है।
“सोना चमक रहा है, लेकिन देश का व्यापार घाटा रिकॉर्ड तोड़ रहा है!”
अब देखना ये है कि सरकार और RBI इस बड़ी चुनौती से कैसे निपटते हैं।