भारतीय सेना आधुनिक युद्ध के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रही है। अब लड़ाई सिर्फ बंदूकों और ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक और ड्रोनों से लड़ी जाएगी। सेना ने एक नई विशेष इकाई बनाई है – ‘भैरव’ स्पेशल फोर्स। यह सेना की सबसे नई और खास यूनिट है, जो दुश्मन को दूर से ही सटीक निशाना बनाने में माहिर है।
आजकल के युद्ध में ड्रोन बहुत बड़ा रोल अदा कर रहे हैं। भारतीय सेना ने इसके लिए जोरदार तैयारी की है। पूरी सेना में 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी गई है। अब हर सैनिक ड्रोन ऑपरेटर बन सकता है!
‘भैरव’ फोर्स क्या है?
‘भैरव’ बटालियनों के हर सैनिक को खास तौर पर ड्रोन चलाने और युद्ध में इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई है। ये ड्रोन दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसकर उनके ठिकानों को तबाह कर सकते हैं। ये सैनिक पैदल सेना की रेजिमेंटों से चुने गए हैं और पिछले 5 महीनों से कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।
ये यूनिट दुनिया के हालिया युद्धों और भारत के अपने अनुभवों से सीख लेकर बनाई गई है। ‘भैरव’ को ‘डेजर्ट फाल्कन्स’ भी कहा जाता है।

इनकी खास भूमिका
‘भैरव’ फोर्स का मकसद एलीट पैरा स्पेशल फोर्स और आम पैदल सेना के बीच की कमी को पूरा करना है। ये तेज़ रफ्तार से हमला करने और दुश्मन के पीछे गहराई तक विशेष ऑपरेशन करने के लिए बनाई गई हैं।

अब तक कितनी तैयार?
सेना ने अभी 15 ऐसी बटालियनों को तैयार कर लिया है। जल्द ही इनकी संख्या 25 तक पहुंच जाएगी। हाल ही में ‘अखंड प्रहार’ अभ्यास में इनकी ताकत का सफल परीक्षण किया गया।
पहली बार पब्लिक में दिखेंगी!
15 जनवरी को जयपुर में होने वाली सेना दिवस परेड में ‘भैरव’ बटालियनें पहली बार जनता के सामने आएंगी। यह देखने लायक होगा!
इसके अलावा सेना ‘आरडीआरए’ ब्रिगेड जैसे एकीकृत युद्ध समूह बना रही है। इसमें पैदल सेना, टैंक, तोपखाना और ड्रोन सब एक साथ मिलकर लड़ेंगे। तोपखाने और बख्तरबंद इकाइयों को भी नए ड्रोन और निगरानी सिस्टम से लैस किया जा रहा है।
सरल उदाहरण से समझिए: ‘भैरव’ यूनिट को सेना की “डिजिटल तलवार” कह सकते हैं। पहले योद्धा सिर्फ तलवार और ताकत से लड़ते थे, लेकिन अब ये सैनिक ड्रोन की मदद से मीलों दूर बैठे दुश्मन को बिना दिखे ही खत्म कर सकते हैं। यह आधुनिक युद्ध की नई ताकत है!
भारतीय सेना अब दुनिया की सबसे मजबूत और तकनीकी रूप से आगे की सेनाओं में शुमार हो रही है।