भारत की नवरत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में करीब 400 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला स्टील को सस्ते दाम पर गलत कंपनियों को बेचने से हुआ।
घोटाले का तरीका SAIL ने 11 लाख मेट्रिक टन से ज्यादा स्टील 100 से ज्यादा ऐसी कंपनियों को बहुत सस्ते दामों पर बेचा, जो कोई निर्माण का काम नहीं कर रही थीं। ये कंपनियां उस स्टील को बाजार में महंगे दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा लेती थीं।
मुख्य कंपनियां
- वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स (VIPPL) और एपीसीओ इंफ्राटेक सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कंपनियां हैं।
- VIPPL कंपनी बनने के सिर्फ 8 दिन बाद SAIL ने उसके साथ MoU साइन कर लिया।
- एवन स्टील को कच्चा माल बाजार से बहुत कम दाम पर दिया गया, जिससे SAIL को करीब 231 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
राजनीतिक कनेक्शन एपीसीओ कंपनी ने 30 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे थे, जिन्हें भाजपा ने भुनाया। कंपनी खुद को प्रधानमंत्री के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने का साथी बताती है।

अधिकारियों पर कार्रवाई लोकपाल और CBI की जांच के बाद इस्पात मंत्रालय ने 29 अधिकारियों को निलंबित किया, जिनमें SAIL और NMDC के डायरेक्टर भी थे। लेकिन 2024 के आम चुनाव के बाद जून 2024 में सभी को बहाल कर दिया गया।
अभी की स्थिति
- लोकपाल ने SAIL के अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई है।
- CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत FIR दर्ज की है।
- लेकिन अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
SAIL का बचाव: MoU पॉलिसी में निर्माण कार्य की जांच का कोई नियम नहीं था। CVC ने इसे “आंख मूंदकर भरोसा करना” कहा।
यह मामला अभी जांच के अधीन है और कई सवाल खड़े कर रहा है।
(स्रोत: न्यूज़ पिंच और संबंधित रिपोर्ट्स)