विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में ऊर्जा की आसान पहुंच, विकास की रफ्तार बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के तरीकों पर रोशनी डाली गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि ऊर्जा हमारे जीवन का अहम हिस्सा है और इसके बिना दुनिया आगे नहीं बढ़ सकती। आइए जानते हैं रिपोर्ट की मुख्य बातें सरल भाषा में।
ऊर्जा विकास का आधार है
ऊर्जा हमारे विकास की कुंजी है। सस्ती और आसानी से मिलने वाली ऊर्जा के बिना अस्पताल चल नहीं सकते, कारोबार नहीं बढ़ सकते और बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर सकते। दुनिया में एक अरब से ज्यादा लोग ‘ऊर्जा गरीबी’ में जी रहे हैं, यानी उनके पास खाना बनाने, रोशनी करने या गर्मी के लिए अच्छी ऊर्जा नहीं है।
वर्तमान में करीब 67.5 करोड़ लोगों के पास बिजली ही नहीं है, और 45 करोड़ लोग बिजली की कटौती से परेशान हैं।

निवेश की जरूरत और चुनौतियां
विकासशील देशों में ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हर साल बिजली बनाने में निवेश को 280 अरब डॉलर से बढ़ाकर 630 अरब डॉलर तक करना होगा, और यह 2035 तक जारी रखना पड़ेगा। सरकारी पैसा कम है, इसलिए आधा से ज्यादा निवेश प्राइवेट कंपनियों से आना चाहिए।
साथ ही, 2050 तक इन देशों में 7.3 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा बिजली की लाइनें जोड़नी या अपडेट करनी होंगी।

विश्व बैंक की योजनाएं और बड़े कदम
विश्व बैंक ने ‘मिशन 300’ शुरू किया है, जो अफ्रीकी विकास बैंक के साथ मिलकर 2030 तक अफ्रीका के 30 करोड़ लोगों को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। बैंक देशों को उनकी जरूरत के हिसाब से ऊर्जा चुनने में मदद करता है, जैसे सौर, पवन, जलविद्युत, प्राकृतिक गैस और अब परमाणु ऊर्जा भी।
खाना बनाने के लिए साफ तरीके न होने से 2.1 अरब लोग प्रभावित हैं। बैंक ने इसके लिए 837 मिलियन डॉलर से ज्यादा इकट्ठा किए हैं। ऊर्जा बचत भी महत्वपूर्ण है – नया पावर प्लांट बनाने से सस्ता है। भारत में LED बल्ब बांटने से हर साल 11,200 GWh बिजली बचती है।

कुछ देशों के सफल उदाहरण
- रवांडा: 2009 में सिर्फ 6% लोगों के पास बिजली थी, अब 2024 में 75% से ज्यादा हो गई है।
- तंजानिया: पिछले 5 सालों में 80 लाख से ज्यादा लोगों को बिजली मिली, और लगभग सभी गांवों में ग्रिड पहुंच गया है।
- भारत: ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री बनाने और नौकरियां पैदा करने के लिए 3 अरब डॉलर की मदद मिल रही है।
- नाइजीरिया: DARES प्रोजेक्ट से 1.7 करोड़ लोग नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ेंगे।

पर्यावरण की रक्षा और उत्सर्जन कम करना
विश्व बैंक 2010 से किसी नए कोयला पावर प्लांट को पैसा नहीं दे रहा है। वे मीथेन गैस कम करने और कोयला प्लांटों को बंद करने या दूसरे कामों में बदलने में मदद कर रहे हैं।
यह रिपोर्ट दिखाती है कि ऊर्जा, विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलना जरूरी है। विश्व बैंक के प्रयासों से दुनिया बेहतर हो सकती है।