एस्टोनिया ने शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाकर दुनिया में एक नया उदाहरण पेश किया है। यहां की सरकार मानती है कि यह तकनीक बच्चों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करेगी। आइए जानते हैं कि एस्टोनिया के स्कूलों में एआई कैसे इस्तेमाल हो रहा है और इसके फायदे-नुकसान क्या हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर एआई की शुरुआत
एस्टोनिया दुनिया का पहला देश है जहां एआई आधारित शिक्षा को पूरे देश में लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे युवा पीढ़ी को आने वाली नौकरियों के लिए तैयार किया जा सकता है। यह पहल पूरे देश के स्कूलों में फैली हुई है।

क्लासरूम में एआई का उपयोग
एस्टोनिया की राजधानी तालिन के स्कूलों में बच्चे चैटजीपीटी के स्पेशल एजुकेशन वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इससे गणित के मुश्किल सवाल समझते हैं, अपनी पढ़ाई को आसान बनाते हैं और विषयों को अपने स्तर के हिसाब से सीखते हैं। यह बच्चों की मदद करता है लेकिन पूरी तरह से पढ़ाई का बोझ नहीं लेता।
शिक्षकों की भूमिका और चुनौतियां
शिक्षक एआई को सीखने में बहुत उपयोगी मानते हैं, लेकिन इसकी कुछ कमियां भी हैं। अभी एआई का ज्यादा इस्तेमाल लेक्चर प्लानिंग में हो रहा है, जिससे क्लास में बच्चों के बीच बातचीत के लिए ज्यादा समय मिल जाता है। शिक्षकों को अब एआई वाले काम बहुत सावधानी से तैयार करने पड़ते हैं, ताकि एआई बच्चे की जगह न ले ले बल्कि उसकी मदद करे।

मानवीय बातचीत का महत्व
जर्मन टीचर कारमेन कीसेल कहती हैं कि क्लास में बच्चों के बीच बातचीत सबसे जरूरी है, और एआई इसमें पीछे रह जाता है। एआई खुद से बेहतर पढ़ाने के तरीके नहीं अपनाता; इसके लिए शिक्षक को ही सोचना पड़ता है।
डिजिटल साक्षरता और गोपनीयता
स्कूलों में एआई आने से डिजिटल साक्षरता और डेटा की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों को सिखाया जा रहा है कि एआई के जवाबों को कैसे चेक करें और अपनी पर्सनल जानकारी को कैसे सुरक्षित रखें।
