भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हाल ही में एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) नाम की तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस वजह से भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां यह उन्नत तकनीक मौजूद है, जैसे अमेरिका, रूस और चीन। यह तकनीक हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों को बनाने में बहुत मददगार है और दुश्मन के खिलाफ भारत को मजबूत फायदा देती है।

SFDR तकनीक क्या है और भारत की यह उपलब्धि क्यों खास है?
एसएफडीआर एक खास तरह का इंजन है जो मिसाइलों को ज्यादा दूर और तेजी से उड़ाने में मदद करता है। भारत ने इस तकनीक का टेस्ट करके दिखा दिया है कि हम अब दुनिया के बड़े देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह मिसाइल दुश्मन के हवाई हमलों से बचाव में बहुत कारगर साबित होगी।
पारंपरिक रॉकेट इंजन और SFDR रैमजेट इंजन में क्या फर्क है?
सामान्य रॉकेट इंजन में ईंधन जलाने के लिए ऑक्सीडाइजर और ईंधन दोनों को साथ लेकर चलना पड़ता है। इस वजह से ऑक्सीडाइजर का टैंक आधा जगह घेर लेता है, जिससे मिसाइल का वजन बढ़ जाता है और रेंज कम हो जाती है।
लेकिन SFDR रैमजेट एक ‘एयर ब्रीथिंग’ इंजन है, मतलब यह हवा से खुद ऑक्सीजन लेता है। इसलिए इसमें अलग से ऑक्सीडाइजर का टैंक नहीं लगता। उस जगह पर ज्यादा ईंधन भरा जा सकता है, जिससे मिसाइल ज्यादा दूर तक जा सकती है और ज्यादा ताकतवर बन जाती है।
SFDR में ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है, जो स्टोर करने में आसान है। इसमें लीक होने का खतरा नहीं होता और यह तरल ईंधन से ज्यादा ऊर्जा देता है।
SFDR की कार्यप्रणाली और गति कैसे काम करती है?
यह इंजन हवा को दबाकर (कंप्रेस करके) इस्तेमाल करता है, लेकिन इसके लिए मिसाइल को पहले तेज गति पर पहुंचना पड़ता है। शुरू में थोड़ा सा ऑक्सीडाइजर देकर इसे न्यूनतम स्पीड दी जाती है, फिर यह खुद हवा से ऑक्सीजन लेकर चलता है।
रैमजेट और स्क्रैमजेट में फर्क यह है कि रैमजेट तब इस्तेमाल होता है जब मिसाइल की स्पीड 5 मैक (ध्वनि की गति से 5 गुना ज्यादा) से ऊपर होती है। इतनी तेज गति पर स्क्रैमजेट अच्छा काम नहीं करता।
SFDR के फायदे क्या हैं?
सामान्य रॉकेटों में ईंधन शुरू में ही जल जाता है, इसलिए लक्ष्य के पास पहुंचते-पहुंचते उनकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन SFDR में ईंधन को कंट्रोल करके जलाया जाता है, जिससे मिसाइल आखिर तक तेज चलती रहती है। इससे मिसाइल ज्यादा फुर्तीली बन जाती है और दुश्मन के लिए इससे बचना मुश्किल हो जाता है।