व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर भारत में बड़ा विवाद चल रहा है। एक वीडियो में इस मुद्दे पर विस्तार से बात की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां, पॉलिसी में बदलाव, जुर्माना और डेटा सिक्योरिटी जैसे मुद्दे शामिल हैं। आइए जानते हैं पूरी कहानी आसान भाषा में।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप को साफ-साफ चेतावनी दी है कि या तो भारत के कानूनों का पालन करो या देश छोड़कर चले जाओ। कोर्ट ने कहा कि लोगों की निजता (प्राइवेसी) के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी ऐसी बनाई गई है कि यूजर्स को गुमराह किया जा सके। कोर्ट ने नागरिकों की प्राइवेसी को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

प्राइवेसी पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ?
यह विवाद जनवरी 2021 से शुरू हुआ, जब व्हाट्सएप की कंपनी मेटा ने अपनी पॉलिसी बदल दी। पहले कंपनी ने वादा किया था कि यूजर्स का डेटा किसी के साथ शेयर नहीं किया जाएगा। लेकिन नई पॉलिसी में कहा गया कि यूजर्स का डेटा फेसबुक के साथ शेयर किया जा सकता है। यह एक तरह का “मानो या छोड़ो” वाला विकल्प था, जिसमें यूजर्स के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इससे यूजर्स को मजबूरन पॉलिसी माननी पड़ी।

जुर्माना और कानूनी लड़ाई
कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने व्हाट्सएप पर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने के लिए 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। एनसीएलएटी ने कुछ राहत दी, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा। जब मेटा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, तो कोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कंपनी को भारतीय कानूनों का सम्मान करना होगा।
सिक्योरिटी और डेटा लीक के दावे
भारत में व्हाट्सएप के करीब 75 करोड़ यूजर्स हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। वियना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि व्हाट्सएप में सिक्योरिटी की कमियां हैं, जिससे यूजर्स की तस्वीरें और स्टेटस लीक हो सकते हैं। इसके अलावा, सैन फ्रांसिस्को की एक कोर्ट में आरोप लगा है कि कंपनी के पास एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होने के बावजूद प्राइवेट मैसेज पढ़ने की क्षमता है।

पारदर्शिता की जरूरत
वीडियो में कहा गया है कि व्हाट्सएप एक प्राइवेट कंपनी है, जिसका मकसद पैसे कमाना है। इसलिए उसके दावों, जैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, को बिना सबूत के नहीं माना जा सकता। कंपनी को एथिकल हैकर्स या किसी भारतीय एजेंसी से अपनी तकनीक की जांच करानी चाहिए, ताकि सब कुछ पारदर्शी रहे।
अगर व्हाट्सएप भारतीय कानूनों का पालन नहीं करता और पारदर्शिता नहीं दिखाता, तो उसे भारत में बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यह मुद्दा यूजर्स की प्राइवेसी और सिक्योरिटी से जुड़ा है, इसलिए सरकार और कोर्ट सख्ती बरत रहे हैं।