आजकल स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां अब आपके फोन को कर्ज न चुकाने पर दूर से बंद करने की तकनीक इस्तेमाल करना चाहती हैं? इसे ‘किल स्विच’ कहते हैं। एक वीडियो में इस तकनीक और डिजिटल कंट्रोल से कर्ज वसूली के बारे में चर्चा की गई है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये क्या है और इसके क्या खतरे हैं।
किल स्विच क्या है?
किल स्विच एक ऐसी सुविधा है जिससे कोई भी फोन को दूर से लॉक कर सकता है। पहले ये सिर्फ चोरी हुए फोन को रोकने के लिए इस्तेमाल होता था। लेकिन अब बैंक और कंपनियां इसे ईएमआई (किस्त) न चुकाने पर फोन ब्लॉक करने के लिए यूज करना चाहती हैं। मतलब, अगर आपकी किस्त मिस हो गई, तो आपका फोन पूरी तरह बंद हो सकता है।

फोन बन जाएगा ‘डब्बा’
अगर ईएमआई नहीं चुकाई, तो फोन काम करना बंद कर देगा। ऐप्स नहीं चलेंगे, कॉल नहीं कर पाएंगे, यूपीआई से पेमेंट नहीं होगा, डिजिलॉकर या आधार जैसी सेवाएं बंद हो जाएंगी। आपका अपना डेटा भी आपके कंट्रोल से बाहर हो जाएगा। ये सब आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर सकता है।
तकनीक से कर्ज वसूली क्यों?
छोटे लोन, जैसे 10,000-15,000 रुपये के, पर कानूनी तरीके से वसूली करना महंगा पड़ता है। इसलिए कंपनियां सॉफ्टवेयर से फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर कंट्रोल लेकर पैसा वसूलना चाहती हैं। भारत में करीब 60% फोन ईएमआई पर खरीदे जाते हैं, तो ये तरीका बहुत असरदार हो सकता है।
मौलिक अधिकारों पर असर
स्मार्टफोन अब सिर्फ फोन नहीं, बल्कि आपकी पहचान (आधार), बैंक (यूपीआई) और पढ़ाई का माध्यम है। अगर फोन लॉक हो गया, तो ये अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन हो सकता है। मिसाल के लिए, कोई डिलीवरी राइडर अपनी कमाई का साधन खो देगा या इमरजेंसी कॉल भी नहीं कर पाएगा। इसे ‘सोशल डेथ’ या सामाजिक मृत्यु और ‘डिजिटल गुलामी’ कहा जा रहा है।
निजता का बड़ा खतरा
किल स्विच यूज करने के लिए बैंक को आपके फोन के गहराई तक पहुंच चाहिए, जहां वे लगातार निगरानी कर सकें। इससे आपकी लोकेशन ट्रैकिंग और ऐप यूज की जासूसी हो सकती है। ये डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के नियमों के खिलाफ जा सकता है।

भविष्य में क्या होगा?
आज फोन बंद हो रहा है, तो कल बिजली बिल न देने पर स्मार्ट मीटर बंद हो सकता है या बीमा प्रीमियम न देने पर हेल्थ कार्ड। ये एक चेन रिएक्शन की तरह फैल सकता है, जो डिजिटल दुनिया में बड़ा संकट पैदा करेगा।
आरबीआई का क्या कहना है?
आरबीआई का मानना है कि इससे लोन डिफॉल्ट कम होगा, वसूली आसान बनेगी और कर्ज सस्ता मिलेगा। लेकिन सवाल ये है कि क्या सस्ते कर्ज के लिए ‘डिजिटल गरिमा’ या सम्मान की कीमत चुकानी चाहिए?