आज की दुनिया में फैशन इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण को बड़ा नुकसान भी हो रहा है। ज्यादा कपड़े बनाना, कचरा बढ़ाना और सेकंड हैंड मार्केट का इस्तेमाल करके भी समस्या हल नहीं हो रही। आइए जानते हैं पूरी कहानी सरल भाषा में।
फैशन कचरे का संकट और ज्यादा उत्पादन
Fashion Waste Crisis and Over-Production
फैशन इंडस्ट्री में ज्यादा उत्पादन एक बड़ी समस्या है। अध्ययन बताते हैं कि 10 से 30 प्रतिशत कपड़े कभी नहीं बिकते और न ही कभी पहने जाते हैं। रिसाइक्लिंग में सुधार होने के बावजूद, ज्यादा सामान बनाना इस समस्या को और बढ़ा रहा है। लिस रिकेड्स का फाउंडेशन हर हफ्ते घाना के समुद्र तटों से 20 टन कपड़ों का कचरा उठाता है। इसके अलावा, प्राइमार्क और शीन जैसे ब्रांड्स आने से बाजार में शुद्ध पॉलीस्टर जैसी चीजों की भरमार हो गई है, जिन्हें सिर्फ कचरा ही माना जाता है।

सेकंड हैंड बाजार की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता
Growing Popularity of Second-Hand Market
दुनिया भर में पुराने कपड़ों का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में यह 227 अरब डॉलर का हो गया है, जो नए कपड़ों के बाजार से दो से तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है। कपड़ों को दोबारा बेचने या ठीक करके इस्तेमाल करने से 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 16 प्रतिशत तक कम हो सकता है। आजकल अमेरिका में रिसेल की 88 प्रतिशत कमाई ऑनलाइन लेन-देन से आती है।

बड़ी कंपनियों की भागीदारी और मार्केटिंग की चालाकियां
Big Companies’ Involvement and Marketing Tricks
अब लुलुलेमन, जारा, द नॉर्थ फेस और शीन जैसे बड़े ब्रांड्स के खुद के रिसेल प्लेटफॉर्म हैं। एचएंडएम (H&M) जैसी कंपनियां ‘सेल्पी’ (Sellpy) जैसे प्लेटफॉर्म्स की मालिक हैं। ये ग्राहकों को बताती हैं कि सेकंड हैंड कपड़े खरीदने से कितना पानी और उत्सर्जन बचा, ताकि ग्राहक खुद को ‘हीरो’ जैसा महसूस करें। लेकिन चालाकी से ये कंपनियां रिसेल प्लेटफॉर्म्स पर नए कपड़ों के स्पॉन्सर्ड पोस्ट दिखाती हैं। जालांडो (Zalando) जैसी कंपनियां पुराने कपड़ों के बदले ‘इन-स्टोर क्रेडिट’ देती हैं, जिससे ग्राहक सिर्फ नए कपड़े ही खरीद सकते हैं। इससे नए सामान का कारोबार बढ़ता है।
ज्यादा खरीदारी का खतरा
Danger of Over-Consumption
सिर्फ सेकंड हैंड कपड़े खरीदना पर्यावरण को नहीं बचाता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कितनी बार पहनते हैं। अध्ययन कहते हैं कि नई शर्ट को बार-बार पहनने की तुलना में, पुरानी टी-शर्ट खरीदकर उसे सिर्फ दो बार पहनने से पर्यावरण को ज्यादा नुकसान होता है।