भारतीय आईटी क्षेत्र में हाल ही में बड़ा संकट आया है। बुधवार को शेयर बाजार में आईटी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में पिछले 5 सालों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स 6% से ज्यादा नीचे गिर गया। इससे इंफोसिस, एचसीएल, टीसीएस और विप्रो जैसी बड़ी कंपनियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक सामान्य गिरावट नहीं है, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ा खतरा है। यह वैश्विक स्तर पर भी हुआ, जहां अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में भी 6% की गिरावट आई और एक ही दिन में 300 अरब डॉलर का बाजार मूल्य खत्म हो गया।
आईटी सेक्टर में गिरावट का कारण
यह गिरावट मुख्य रूप से एआई की नई तकनीकों से हुई है। एंथ्रोपिक एआई नाम की कंपनी ने नए अपडेट लाए हैं, जिन्हें ‘क्लाउड कोवर्क’ और ‘क्लाउड कोड’ कहा जाता है। ये सामान्य चैटबॉट नहीं हैं, बल्कि असली एआई एजेंट हैं। पुराने चैटबॉट सिर्फ बातें करते थे और साधारण जवाब देते थे, लेकिन ये नए एजेंट काम खुद करते हैं। वे सॉफ्टवेयर बनाते हैं, कोड को टेस्ट और ठीक करते हैं, और यहां तक कि कानूनी कागजात भी तैयार कर लेते हैं।

बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
भारतीय आईटी कंपनियां पहले इंसानों के काम के घंटों पर आधारित थीं, यानी जितने घंटे काम, उतना पैसा। लेकिन एआई का मॉडल अलग है। इसमें लागत बहुत कम है और यह अनंत तरीके से बढ़ सकता है। अब कंपनियां कर्मचारियों की संख्या के बजाय काम के प्रभाव पर ध्यान दे रही हैं। एआई सीधे नौकरियां नहीं छीन रहा, लेकिन यह छोटे-छोटे कामों को खत्म कर रहा है। इससे धीरे-धीरे कई नौकरियां खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगी।

भविष्य की राह और जरूरी कौशल
यह स्थिति भारतीय आईटी सेक्टर के लिए ‘कोडक मोमेंट’ जैसी है, जहां पुरानी चीजें इतिहास बन जाती हैं। युवाओं को सुरक्षित रहने के लिए डिग्री या नौकरी के नाम पर नहीं बैठना चाहिए। इसके बजाय:
- सीखना को जीवन का हिस्सा बनाएं, न कि सिर्फ एक समय का काम।
- रचनात्मक समस्या सुलझाने, फैसले लेने और बदलावों के साथ चलने जैसे इंसानी कौशल सीखें, जिन्हें मशीनें नहीं कर सकतीं।
- डिजिटल सोच अपनाएं, क्योंकि अब पैसा इंसानों से ज्यादा डिजिटल मशीनों की तरफ जा रहा है।

अंत में, यह सवाल उठता है कि क्या हम नौकरी रहित भविष्य की ओर जा रहे हैं, या यह अर्थव्यवस्था का ‘सृजनात्मक विनाश’ का दौर है, जहां पुराना खत्म होकर नया आता है।