नाइजीरिया में एक महिला उद्यमी रीता इदेहाई ने कचरे की बड़ी समस्या को एक सुनहरे अवसर में बदल दिया है। वह इकोबार्टर नाम की कंपनी की संस्थापक और सीईओ हैं। उनका मुख्य लक्ष्य है कि कचरे को रिसाइकल करके पर्यावरण को बचाना और लोगों को रोजगार देना। नाइजीरिया में 90 प्रतिशत कचरा खुले में फेंका या जलाया जाता है, जो हवा में जहरीली गैसें फैलाता है और जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देता है। रीता की कंपनी इस समस्या से लड़ रही है और लोगों को जागरूक कर रही है।

कचरे को कैसे प्रोसेस करती है कंपनी?
इकोबार्टर में प्लास्टिक की बोतलों और अन्य सामान को अलग-अलग किया जाता है। वे PET, PP और HDPE जैसे विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक को छांटते हैं। फिर, बोतलों को दबाकर गट्ठर (बेल) बनाते हैं। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च कम होता है और ये गट्ठर फैक्टरियों में भेजे जाते हैं जहां नए सामान बनाए जाते हैं। यह तरीका सरल लेकिन प्रभावी है, जो कचरे को बेकार होने से बचाता है।

महिलाओं को सशक्त बनाना
कंपनी विशेष रूप से गरीब और विधवा महिलाओं को रोजगार देती है। ये महिलाएं प्लास्टिक के थैलों और पानी के पाउच से ‘फ्लैब्रिक’ नाम का एक खास कपड़ा बनाती हैं। इस कपड़े से जूते, बैग, चटाई और कपड़े तैयार होते हैं। इससे महिलाएं घर बैठे या समुदाय में काम करके पैसे कमा सकती हैं, बिना सामाजिक बंधनों को तोड़े। यह न केवल उनकी आर्थिक मदद करता है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है। रीता कहती हैं कि यह काम महिलाओं को नई उम्मीद देता है और समाज में उनका सम्मान बढ़ाता है।

नई तकनीक का कमाल: रिवर्स वेंडिंग मशीन
रीता ने नाइजीरिया में पहली बार लोकल स्तर पर बनी रिवर्स वेंडिंग मशीन बनाई है। यह मशीन बहुत स्मार्ट है। लोग अपनी पुरानी प्लास्टिक बोतलें इसमें डालते हैं, QR कोड स्कैन करते हैं और सीधे अपने बैंक अकाउंट में पैसे मिल जाते हैं। ये पैसे वे बिजली बिल भरने या इंटरनेट डेटा खरीदने में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह तकनीक रिसाइक्लिंग को मजेदार और आसान बनाती है, जिससे ज्यादा लोग इसमें हिस्सा लेते हैं।

बड़ा प्रभाव और सफलता की कहानी
इकोबार्टर की वजह से लोगों की सोच बदल रही है। पहले जहां कचरा समस्या था, अब वह कमाई का स्रोत बन गया है। पिछले एक साल में कंपनी से जुड़ने वाले लोगों की संख्या 3,000 से बढ़कर 13,000 हो गई है। रीता को गर्व है कि उन्होंने शून्य से शुरू करके हजारों लोगों के लिए रोजगार और बेहतर जीवन बनाया है। यह मॉडल न केवल नाइजीरिया बल्कि पूरे अफ्रीका और दुनिया के अन्य हिस्सों में अपनाया जा सकता है, जहां प्लास्टिक प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहल से हम ग्लोबल वार्मिंग को कम कर सकते हैं और सस्टेनेबल विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।