भारत में बाल विवाह आज भी एक बड़ी सामाजिक समस्या बना हुआ है। देश सतत विकास लक्ष्य (SDG) 5.3, जो बाल विवाह को खत्म करने का लक्ष्य रखता है, को हासिल करने से पीछे है। खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्यों में यह समस्या बहुत गंभीर है, जहां बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है।
बाल विवाह का आलम
भारत में कानून कहता है कि 18 साल से कम उम्र में शादी करना बाल विवाह है, जो गैरकानूनी है। फिर भी, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के मुताबिक, 23% से ज्यादा महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो जाती है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और असम में यह आंकड़ा 30% से भी ज्यादा है। हालांकि पिछले कुछ सालों में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, लेकिन यह कमी बहुत धीमी है और गरीब तबकों में यह समस्या अब भी गंभीर है।
क्यों हो रहा है बाल विवाह?
बाल विवाह के पीछे कई कारण हैं:
- गरीबी और दहेज: गरीब परिवारों में माता-पिता अपनी बेटियों की जल्दी शादी कर देते हैं ताकि दहेज का बोझ कम हो।
- सामाजिक मान्यताएं: समाज में लड़कियों को परिवार की इज्जत से जोड़ा जाता है, जिसके चलते उनकी जल्दी शादी कर दी जाती है।
- शिक्षा की कमी: जिन लड़कियों को स्कूल जाने का मौका नहीं मिलता, उनकी शादी जल्दी होने की आशंका ज्यादा रहती है।
- कमजोर कानून लागू करना: बाल विवाह रोकने के लिए कानून तो हैं, लेकिन इन्हें लागू करने में कमी है।
कौन सबसे ज्यादा प्रभावित?
- शिक्षा का स्तर: बिना स्कूली शिक्षा वाली 48% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती है, जबकि पढ़ी-लिखी लड़कियों में यह आंकड़ा केवल 4% है।
- आर्थिक स्थिति: गरीब परिवारों में बाल विवाह ज्यादा होता है।
- ग्रामीण बनाम शहरी: गांवों में यह समस्या शहरों की तुलना में ज्यादा गंभीर है।
- धर्म और जाति: हिंदू, मुस्लिम, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में बाल विवाह की दर अधिक है।
कानून और योजनाएं
भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है, और 2021 में एक नया विधेयक लाया गया, जो लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने का प्रस्ताव रखता है। इसके अलावा, कन्याश्री, धन लक्ष्मी और रूपाश्री जैसी योजनाएं चल रही हैं। लेकिन इन योजनाओं के बावजूद बाल विवाह पूरी तरह रुक नहीं पाया है। खासकर पश्चिम बंगाल में, जहां कन्याश्री योजना ने स्कूल में दाखिला तो बढ़ाया, लेकिन बाल विवाह को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हुई।
बाल विवाह का असर
- लड़कियों पर: पढ़ाई छूटना, कम उम्र में गर्भावस्था, कुपोषण, हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं।
- समाज और अर्थव्यवस्था पर: शिक्षा और नौकरी के अवसरों में कमी, देश और राज्यों की आर्थिक प्रगति पर नकारात्मक असर। अगर बाल विवाह खत्म हो जाए, तो 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था में खरबों रुपये का योगदान हो सकता है।
आगे क्या?
बाल विवाह को रोकने के लिए केवल कानून काफी नहीं हैं। इसके लिए शिक्षा को बढ़ावा देना, गरीबी कम करना, सामाजिक सोच बदलना और कानूनों को सख्ती से लागू करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को 2030 तक SDG लक्ष्य हासिल करना है, तो अभी से तेजी से काम शुरू करना होगा।
निष्कर्ष
बाल विवाह न केवल लड़कियों के भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे देश की प्रगति को भी बाधित करता है। इसे रोकने के लिए सरकार, समाज और परिवारों को मिलकर काम करना होगा। क्या भारत इस चुनौती से पार पा सकेगा? यह सवाल समय के साथ ही जवाब देगा।