अडानी ग्रुप ने AI के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अगले 10 सालों में AI के लिए 100 बिलियन डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने का ऐलान किया है। यह निवेश भारत को AI की दुनिया में मजबूत बनाने और वैश्विक स्तर पर अमेरिका जैसे देशों को चुनौती देने का हिस्सा है। आइए जानते हैं इसकी मुख्य बातें।

अडानी का 100 बिलियन डॉलर का निवेश
अडानी ग्रुप AI के बुनियादी ढांचे में यह बड़ा निवेश कर रहा है। इसका ज्यादातर हिस्सा डेटा सेंटर्स बनाने में लगेगा। ये सेंटर्स बहुत सारा डेटा हैंडल कर सकेंगे। खास बात यह है कि ये डेटा सेंटर्स सौर और पवन ऊर्जा जैसी रिन्यूएबल एनर्जी से चलेंगे। इससे भारत को लागत में बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि बिजली सस्ती पड़ेगी।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
आज भारत दुनिया का 20% डेटा बनाता है, लेकिन हमारे पास वैश्विक डेटा सेंटर्स की केवल 3% क्षमता है। इस निवेश से यह कमी दूर होगी और भारत अपने डेटा पर खुद नियंत्रण रख सकेगा। लक्ष्य है कि भारत AI सेवाओं का सिर्फ इस्तेमाल करने वाला नहीं, बल्कि बड़ा उत्पादक और निर्यातक बने। अडानी इसके लिए गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रहा है। उदाहरण के लिए, विशाखापट्टनम में गूगल के साथ प्रोजेक्ट चल रहा है।
ट्रंप का ‘प्रोजेक्ट स्टारगेट’ और भारत की चुनौती
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने AI में अमेरिका को नंबर वन बनाने के लिए 500 बिलियन डॉलर का ‘प्रोजेक्ट स्टारगेट’ शुरू किया है। लेकिन भारत का निवेश (अडानी, रिलायंस और टाटा मिलाकर 125 बिलियन डॉलर) इसे चुनौती देगा।
- डेटा का अपना नियंत्रण: भारत अपना डेटा अमेरिका भेजने की बजाय खुद स्टोर करेगा, जिससे अमेरिकी सेंटर्स की डिमांड कम होगी।
- सस्ता ऑप्शन: रिन्यूएबल एनर्जी की वजह से भारत सस्ते रेट पर AI कंप्यूटिंग दे सकेगा, जो दुनिया भर के स्टार्टअप्स और कंपनियों को आकर्षित करेगा।
- ग्लोबल साउथ का लीडर: ब्रिक्स जैसे देश जो अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहते, उनके लिए भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनेगा।

आर्थिक प्रभाव क्या होंगे?
यह 100 बिलियन डॉलर का निवेश एक पूरा सिस्टम बनाएगा। इससे सीमेंट, हार्डवेयर बनाने, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में 150 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश आएगा। कुल मिलाकर अगले 10 सालों में इस फील्ड में 250 बिलियन डॉलर का निवेश हो सकता है। इससे नौकरियां बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
यह कदम अमेरिका के AI पर एकाधिकार को तोड़ने और भारत को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है। इससे भारत AI की वैश्विक रेस में आगे आएगा और विकासशील देशों के लिए एक मिसाल बनेगा।