गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 100 साल की मैच्योरिटी वाला बॉन्ड जारी किया है, जिसे ‘सेंचुरी बॉन्ड’ कहते हैं। यह बॉन्ड आमतौर पर सरकारें जारी करती हैं, लेकिन अब बड़ी टेक कंपनियां भी इसमें कूद रही हैं। यह कदम अल्फाबेट को एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

क्या है यह सेंचुरी बॉन्ड?
अल्फाबेट ने ब्रिटेन के बाजार में 1 बिलियन ब्रिटिश पाउंड (करीब 1.37 बिलियन डॉलर) के बॉन्ड बेचे हैं। इन बॉन्ड्स पर 6.125% का ब्याज मिलेगा। यह ब्याज सरकारी बॉन्ड्स से ज्यादा है, इसलिए निवेशकों को यह काफी पसंद आ रहा है। सामान्य बॉन्ड्स की तुलना में यह लंबे समय का है, जो कंपनी को लंबे समय तक पैसे का इस्तेमाल करने की आजादी देता है।

इतना पैसा क्यों चाहिए अल्फाबेट को?
यह पैसा मुख्य रूप से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए इस्तेमाल होगा। इसमें डेटा सेंटर, चिप्स और बिजली बनाने के लिए जरूरी चीजें शामिल हैं। एआई की चीजें लंबे समय तक चलती हैं, इसलिए 100 साल का बॉन्ड सही लगता है। सिर्फ यह बॉन्ड नहीं, अल्फाबेट ने 24 घंटों में कुल 32 बिलियन डॉलर के बॉन्ड बेच दिए हैं।

ब्रिटेन का बाजार क्यों चुना?
अल्फाबेट ने ब्रिटेन को इसलिए चुना क्योंकि वहां पेंशन फंड और इंश्योरेंस कंपनियां जैसे बड़े निवेशक हैं। इनको लंबे समय के निवेश की जरूरत होती है। साथ ही, कंपनी अलग-अलग मुद्राओं में कर्ज लेकर मुद्रा के जोखिम को कम करना चाहती है।
जोखिम और चिंताएं क्या हैं?
पुराना उदाहरण: मोटोरोला ने 1997 में ऐसा ही बॉन्ड जारी किया था। वह मोबाइल बाजार का बादशाह था, लेकिन आईफोन आने के बाद गिर गया। यह बताता है कि 100 साल तक टॉप पर रहना मुश्किल है।
एआई का कर्ज बबल: एआई के लिए इतना कर्ज लेना एक बबल बन सकता है। अगर रिटर्न नहीं मिला, तो बाजार में बड़ा नुकसान हो सकता है।
ब्याज दर का असर: लंबे बॉन्ड्स में ब्याज दर बदलने से कीमत में ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है।

सरकार बनाम बड़ी टेक कंपनियां
अल्फाबेट के बॉन्ड की मांग सरकारी बॉन्ड्स जैसी है और यह 9.5 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। इससे सरकारों को चिंता हो सकती है, क्योंकि निवेशक अब टेक कंपनियों पर ज्यादा भरोसा कर सकते हैं। इससे सरकारों को पैसा जुटाना मुश्किल होगा।

भारतीय कंपनियों के लिए क्या सबक?
भारतीय कंपनियां भी इस ट्रेंड से सीख सकती हैं। एआई की रेस में बने रहने के लिए कर्ज बाजार से बड़ा पैसा जुटाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
यह कदम दिखाता है कि टेक की दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है। अल्फाबेट जैसे दिग्गज एआई के जरिए भविष्य को मजबूत बनाने में जुटे हैं, लेकिन जोखिम भी कम नहीं हैं।
