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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में कथित धोखाधड़ी के विवाद के बीच, पुणे की कुछ सीटों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के सत्यापन और मॉक पोल की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई है। यह कदम हदपसर और खडकवासला निर्वाचन क्षेत्रों में उठाए गए सवालों के जवाब में उठाया गया है, जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के हारे हुए उम्मीदवारों ने EVM में अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
विवरण:
- हदपसर सीट: NCP (SP) के उम्मीदवार प्रशांत जगताप, जो मौजूदा NCP विधायक चेतन तुपे से 7,122 वोटों से हार गए थे, ने हदपसर के 27 मतदान केंद्रों की EVM की जांच की मांग की है। उनका दावा है कि इन मतदान केंद्रों पर अनियमितताओं के कारण उनकी हार हुई। इसके लिए उन्होंने जिला चुनाव अधिकारी को 12.74 लाख रुपये की फीस जमा की है। सत्यापन प्रक्रिया 25 जुलाई से 2 अगस्त 2025 तक भोसरी गोदाम में होगी, जहां EVM को स्टोर किया गया है। इस दौरान मॉक पोल भी आयोजित किया जाएगा।
- खडकवासला सीट: खडकवासला में NCP (SP) के हारे हुए उम्मीदवार सचिन डोडके ने दो EVM के सत्यापन की मांग की है। यह प्रक्रिया भी उसी समयसीमा में होगी।
- सत्यापन की प्रक्रिया: प्रत्येक EVM, जिसमें कंट्रोल यूनिट और VVPAT (वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) शामिल है, की जांच की जाएगी। मॉक पोल में 1,400 वोट डाले जाएंगे ताकि मशीनों की कार्यक्षमता और सटीकता की जांच हो सके। डेटा को मिटाने के बाद, डमी उम्मीदवारों के लिए मॉक पोल आयोजित किया जाएगा, और परिणामों की तुलना VVPAT स्लिप्स से की जाएगी।
- प्रक्रिया की निगरानी: पुणे जिला प्रशासन के उप जिला चुनाव अधिकारी मीनल कलस्कर के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होगी। अंतिम रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी।
- विवाद का पृष्ठभूमि: नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन (BJP, शिवसेना, और NCP) ने 230 सीटें जीतीं, जबकि महा विकास अघाड़ी (MVA) को केवल 46 सीटें मिलीं। MVA नेताओं, खासकर NCP (SP) और कांग्रेस के हारे हुए उम्मीदवारों ने EVM में हेरफेर और मतगणना में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
- कानूनी आधार: सुप्रीम कोर्ट के 26 अप्रैल 2024 के आदेश के अनुसार, दूसरे और तीसरे स्थान पर आए उम्मीदवार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 5% EVM की जांच की मांग कर सकते हैं। इसके लिए प्रति मतदान केंद्र 47,200 रुपये की फीस देनी होती है, जो कि मशीन में छेड़छाड़ पाए जाने पर वापस की जा सकती है।
आरोप और प्रतिक्रिया:
- MVA नेताओं, जैसे रोहित पवार और संजय राउत, ने दावा किया है कि पोस्टल बैलट की गिनती में MVA और महायुति के वोट शेयर में मामूली अंतर था, लेकिन EVM की गिनती के बाद महायुति का वोट शेयर अचानक बढ़ गया।
- इसके जवाब में, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि EVM को दोष देना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि झारखंड में MVA की जीत को निष्पक्ष माना गया, लेकिन महाराष्ट्र में हार के बाद EVM पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- चुनाव आयोग ने EVM को पूरी तरह से टैम्पर-प्रूफ बताया और कहा कि ये मशीनें किसी भी नेटवर्क से कनेक्ट नहीं होतीं।
वर्तमान स्थिति: पुणे में 11 हारे हुए उम्मीदवारों ने 137 EVM की जांच के लिए 66.64 लाख रुपये जमा किए हैं। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत होगी, जिसमें EVM निर्माता कंपनियों (BEL और ECIL) के इंजीनियर शामिल होंगे। हालांकि, नासिक में इसी तरह की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फरवरी 2025 में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।
यह प्रक्रिया EVM की विश्वसनीयता पर उठे सवालों को संबोधित करने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास है।