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अरावली पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत प्रणालियों में से एक है। यह उत्तर भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसके संरक्षण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अरावली क्यों जरूरी है और क्या खतरा मंडरा रहा है।
अरावली का महत्व: क्यों है यह इतनी खास?
- अरावली करीब 2-3.5 अरब साल पुरानी है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के भूगोल और मौसम को आकार देती है।
- यह थार रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती है। इससे गंगा-यमुना के मैदान और दिल्ली-एनसीआर रेगिस्तान बनने से बचते हैं।
- यहां से चंबल, बनास, साबरमती और लूनी जैसी कई नदियां निकलती हैं।
- सरिस्का और रणथंबौर जैसे टाइगर रिजर्व और कई दुर्लभ प्रजातियां यहां रहती हैं।
- यह दिल्ली की हवा को साफ रखने और पानी के स्तर को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है।
उपमा में समझें: अरावली एक विशाल प्राकृतिक दीवार की तरह है। अगर इस दीवार के छोटे-छोटे पत्थरों को हटा दिया जाए, तो दीवार में छेद हो जाएगा और रेगिस्तान की रेत-धूल आसानी से शहरों में घुस आएगी।
सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला: क्या हुआ?
- 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस बी.आर. गवई, के. विनोद चंद्रन और एन.वी. अंजारिया की बेंच) ने अरावली की एक नई एकसमान परिभाषा को मंजूरी दी।
- नई परिभाषा: अरावली की पहाड़ी वह होगी जो अपने आसपास के स्थानीय स्तर से 100 मीटर या इससे ज्यादा ऊंची हो। दो या ज्यादा ऐसी पहाड़ियां अगर 500 मीटर के दायरे में हों, तो वे ‘अरावली रेंज’ कहलाएंगी।
- यह परिभाषा पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश पर आधारित है, जो टी.एन. गोदावर्मन मामले से जुड़ी है।
- अच्छी बात: नए खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी गई है, जब तक ‘सस्टेनेबल माइनिंग प्लान’ (टिकाऊ खनन की योजना) तैयार न हो जाए।
- चिंता की बात: विशेषज्ञों के मुताबिक, राजस्थान में अरावली की ज्यादातर पहाड़ियां 100 मीटर से कम ऊंची हैं। इससे 90% से ज्यादा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिससे खनन और निर्माण का खतरा बढ़ेगा।
खनन का संकट: पहले से क्या नुकसान हुआ?
- फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान और हरियाणा में हजारों जगहों पर अवैध खनन हो चुका है।
- 1975 से 2019 तक अरावली का 8% हिस्सा गायब हो गया। राजस्थान में कई पहाड़ियां पूरी तरह समतल कर दी गईं।
- इससे हरियाणा में लाखों हेक्टेयर जमीन रेगिस्तानी हो गई।
- राजस्थान सरकार को खनन से सालाना हजारों करोड़ की कमाई होती है, जो एक बड़ा कारण है।
- सरकारी नीतियों में विरोधाभास भी देखा गया, जैसे एक विभाग जंगल घोषित करता है तो दूसरा खनन की नीलामी शुरू कर देता।
दिल्ली और एनसीआर पर असर: क्या होगा आगे?
- अरावली कमजोर होने से दिल्ली का AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) और खराब होगा।
- रेगिस्तानी हवाएं और धूल आसानी से एनसीआर में घुसेंगी, जिससे गर्मी, सूखा और प्रदूषण बढ़ेगा।
- विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पूरा क्षेत्र रहने लायक नहीं बचेगा। #SaveAravalli कैंपेन सोशल मीडिया पर तेज हो गया है।
अरावली सिर्फ पहाड़ियां नहीं, बल्कि उत्तर भारत की जीवनरेखा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला संरक्षण की दिशा में कदम है, लेकिन नई परिभाषा से उठे सवालों का जवाब सरकार और समाज को मिलकर ढूंढना होगा। पर्यावरण बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है!