मणिपुर के विष्णुपुर जिले में शनिवार शाम असम राइफल्स के काफिले पर आतंकवादियों ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए और पांच घायल हो गए। यह घटना राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) पर नंबोल सबल लेके के पास हुई, जो इंफाल से ज्यादा दूर नहीं है। इस हमले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
क्या हुआ था?
शनिवार शाम करीब 5:30 से 6:00 बजे के बीच, असम राइफल्स का एक मिनी ट्रक इंफाल से विष्णुपुर की ओर जा रहा था। इस ट्रक में 33 जवान सवार थे। अचानक चार-पांच हथियारबंद आतंकवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया। यह हमला इतना तेज था कि जवानों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
- नुकसान: हमले में दो जवान शहीद हो गए, जबकि पांच जवान घायल हो गए। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को तुरंत इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में भर्ती कराया गया।
- स्थान: यह हमला इंफाल हवाई अड्डे से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर, विष्णुपुर जिले के नंबोल सबल लेके में हुआ। यह जगह मशहूर लोकटक झील और केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान के करीब है।
जवानों ने की जवाबी कार्रवाई
हमले के बाद असम राइफल्स के जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और अतिरिक्त फोर्स बुलाई। पुलिस और असम राइफल्स ने पूरे इलाके को घेर लिया और आतंकवादियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। हमलावरों के भागने के रास्तों को भी बंद कर दिया गया है।
हमले ने क्यों चौंकाया?
यह हमला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि यह इंफाल के बेहद करीब हुआ, जो मणिपुर की राजधानी और अपेक्षाकृत शांत इलाका माना जाता है। आमतौर पर ऐसे हमले पहाड़ी इलाकों या भारत-म्यांमार सीमा के पास होते हैं।
- NH-2 का महत्व: हमला राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर हुआ, जिसे हाल ही में ब्लॉकेज हटाकर खोला गया था। माना जा रहा है कि इस हमले का मकसद इस सड़क को फिर से असुरक्षित करना हो सकता है।
- शांति की कोशिशों पर असर: हाल ही में मणिपुर में शांति बहाली की खबरें आ रही थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और पीड़ितों से मुलाकात के बाद लोगों में उम्मीद जगी थी। लेकिन इस हमले ने शांति की प्रक्रिया को झटका दिया है।
क्या है AFSPA का कनेक्शन?
यह हमला उस इलाके में हुआ, जहां सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) लागू नहीं है। मणिपुर के कुछ हिस्सों में AFSPA हटाया गया है, और यह जगह उनमें शामिल थी। इस घटना के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऐसे संवेदनशील इलाकों में AFSPA को फिर से लागू करना चाहिए।
हमले के पीछे कौन?
असम राइफल्स भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है, जो पूर्वोत्तर में सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाता है। इसीलिए इसे अक्सर निशाना बनाया जाता है। हालांकि, अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पहले भी पीएलए और यूएनएलएफ जैसे संगठनों ने ऐसे हमले किए हैं।
सरकार और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार और अधिकारियों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। मणिपुर में सुरक्षा को और सख्त करने की बात कही जा रही है। सर्च ऑपरेशन और आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज किया जाएगा। साथ ही, इस घटना ने खुफिया तंत्र और सड़क सुरक्षा की कमियों को भी उजागर किया है।
यह हमला मणिपुर में शांति की कोशिशों पर एक बड़ा सवालिया निशान है। असम राइफल्स के जवानों की बहादुरी और बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा। लेकिन इस घटना ने यह भी दिखाया कि पूर्वोत्तर में अभी भी सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार और सुरक्षा बल अब और सतर्कता के साथ इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहे हैं।