परिचय
मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का नाम इतिहास में एक शक्तिशाली योद्धा और सुसंस्कृत शासक दोनों के रूप में गूंजता है। उनकी आत्मकथा ‘तुज्ज़ ए बाबरी’ न केवल उनके जीवन की कहानी बयान करती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व के दो पहलुओं – एक नन्हा सैनिक और एक कला प्रेमी शासक – को भी उजागर करती है। आइए, इस ऐतिहासिक दस्तावेज के जरिए बाबर के जीवन को आसान भाषा में समझें।
तुज्ज़ ए बाबरी: बाबर की अपनी कहानी
तुज्ज़ ए बाबरी बाबर द्वारा लिखी गई एक आत्मकथा है, जो मूल रूप से चगताई तुर्क भाषा में है। इसे बाद में अकबर के समय उनके दरबारी अब्दुल रहीम खानेखाना ने 1589 में फारसी में अनुवाद किया, जिसे बाबरनामा कहा जाता है। इस किताब में बाबर ने अपने जीवन की सच्चाई को बिना किसी लाग-लपेट के लिखा है। अपनी जीत और हार, दोनों को उन्होंने पूरी ईमानदारी से दर्ज किया, जो उनकी सत्यनिष्ठा को दर्शाता है।
बाबर का योद्धा रूप
एक संघर्षमय जीवन
बाबर का जीवन चुनौतियों से भरा रहा। फरगना की गद्दी से लेकर समरकंद, काबुल और हिंदुस्तान तक, उन्होंने हर कदम पर संघर्ष किया। उनकी आत्मकथा का एक बड़ा हिस्सा उनके युद्धों और रणनीतियों का वर्णन करता है।
समरकंद का सपना
बाबर का दिल समरकंद पर अटक गया था। 1497 और 1500 में उन्होंने इसे जीतने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा समय तक कब्जा नहीं रख सके। मध्य एशिया में स्थिरता न मिलने पर उनका ध्यान काबुल की ओर गया, जहां उन्होंने 1504 में बिना किसी बड़े युद्ध के कब्जा कर लिया।
हिंदुस्तान पर नजर
बाबर का मानना था कि हिंदुस्तान का पश्चिमी हिस्सा उनके पूर्वज तैमूर का था, और इसलिए उनका हक बनता है। 1519 में उन्होंने लिखा कि हिंदुस्तान जीतना उनकी सबसे बड़ी इच्छा है। 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराकर उन्होंने मुगल साम्राज्य की नींव रखी। इसके बाद खानवा (1527), चंदेरी (1528) और घाघरा (1529) की लड़ाइयों ने उनकी सैन्य शक्ति को और मजबूत किया।
भारतीय शासकों का जिक्र
बाबर ने अपनी किताब में हिंदुस्तान के पांच बड़े शासकों का जिक्र किया है, जिनमें दिल्ली सल्तनत, गुजरात, मालवा, बहमनी, बंगाल, मेवाड़ और विजयनगर शामिल हैं। खास तौर पर, उन्होंने विजयनगर साम्राज्य को सबसे शक्तिशाली और महान बताया।
धार्मिक कट्टरता?
कुछ मौकों पर बाबर ने धार्मिक कट्टरता दिखाई। उन्होंने कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनवाईं, जो उनके रणनीतिक और राजनीतिक फैसलों का हिस्सा था।
बाबर का सुसंस्कृत रूप
बाबर सिर्फ तलवार का धनी नहीं था; वह कला, साहित्य और प्रकृति का भी प्रेमी था। उनकी आत्मकथा उनके सुसंस्कृत व्यक्तित्व को खूबसूरती से दर्शाती है।
साहित्यिक रुचि
तुज्ज़ ए बाबरी का लेखन बाबर की साहित्यिक प्रतिभा का सबूत है। उन्होंने इसे शुद्ध चगताई तुर्क भाषा में लिखा और इसमें अपनी छोटी-छोटी कविताएं भी शामिल कीं। इन कविताओं से उनके कवि हृदय की झलक मिलती है।
मुगल वास्तुकला की शुरुआत
बाबर के समय में ही भारत में मुगल स्थापत्य कला का प्रारंभ हुआ, जो हिंदुस्तानी, अरबी, फारसी और तुर्की शैलियों का मिश्रण थी। बाबर को भारतीय शिल्पकार बहुत पसंद थे, लेकिन वह तैमूरी और खुरासनी डिजाइनों को इमारतों में देखना चाहता था।
प्रमुख निर्माण
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काबुली बाग मस्जिद (पानीपत): 1527 में पानीपत में बनाई गई, जो उनकी पत्नी मुसम्मद काबली बेगम के नाम पर है।
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संभल की जामा मस्जिद: 1526 में शुरू हुई, जो दक्षिण एशिया की सबसे पुरानी मुगल मस्जिदों में से एक है।
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बाबरी मस्जिद: फैजाबाद में घाघरा नदी के किनारे बनाई गई।
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आरामबाग (रामबाग): आगरा में ताजमहल के पास बना यह भारत का पहला मुगल उद्यान है, जो चारबाग शैली में है।
कला और प्रकृति प्रेम
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चित्रकला: बाबर के समय में मुगल चित्रकला की शुरुआत हुई। उनके दरबार में मशहूर चित्रकार बिहजाद थे, जिन्हें ‘पूर्व का राफेल’ कहा जाता है।
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प्रकृति प्रेम: बाबर को प्रकृति से गहरा लगाव था। उन्होंने अपनी आत्मकथा में फरगना की नदियों, फूलों, पौधों और फलों का जिक्र बड़े प्यार से किया है।
तुज्ज़ ए बाबरी बाबर के दो चेहरों को सामने लाती है। एक तरफ वह एक नन्हा योद्धा था, जिसने समरकंद से हिंदुस्तान तक युद्ध लड़े और मुगल साम्राज्य की नींव रखी। दूसरी तरफ, वह एक सुसंस्कृत शासक था, जिसने साहित्य, कला, वास्तुकला और प्रकृति के प्रति अपने प्रेम को बखूबी व्यक्त किया। बाबर का यह दोहरा व्यक्तित्व उन्हें इतिहास में अनूठा बनाता है।
आप क्या सोचते हैं? बाबर को योद्धा के रूप में ज्यादा याद किया जाए या सुसंस्कृत शासक के रूप में? उनकी आत्मकथा हमें यही सवाल छोड़ जाती है।