बांग्लादेश और चीन के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश न सिर्फ चीन से ड्रोन (UAV – मानवरहित हवाई वाहन) खरीदेगा, बल्कि अपने देश में ही ड्रोन का निर्माण और असेंबलिंग भी करेगा।
यह ड्रोन परियोजना बोगरा एयर बेस पर प्रस्तावित है, जो भारत के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के काफी करीब स्थित है।
क्या है सिलीगुड़ी कॉरिडोर और क्यों है यह अहम?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत का वह संकरा इलाका है जो देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर के सात राज्यों (Seven Sisters) से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई केवल 20–22 किलोमीटर है।
इस क्षेत्र के पास चीन की सैन्य या तकनीकी मौजूदगी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।
भारत की ‘घेराबंदी’ की चीनी रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लंबे समय से भारत को रणनीतिक रूप से घेरने की नीति पर काम कर रहा है।
पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका के बाद अब बांग्लादेश में बढ़ता चीनी प्रभाव इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इसके साथ ही चीन बंगाल की खाड़ी और पूर्वी हिंद महासागर में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जिसके लिए वह बांग्लादेश के बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर रहा है।
भारत–बांग्लादेश रिश्तों में आई ठंडक
हाल के वर्षों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:
- तीस्ता नदी जल विवाद अब तक हल नहीं हो पाया
- भारत की ओर से कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी, जिससे भरोसे में कमी आई
- बांग्लादेशी युवाओं में बढ़ती भारत-विरोधी भावना, जिसे वहां की राजनीति में भी हवा मिल रही है
इन वजहों से बांग्लादेश में चीन को अपने लिए ज्यादा जगह बनाने का मौका मिला है।
भारत के सामने आगे का रास्ता क्या?
रणनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक भारत को अब सिर्फ कूटनीतिक बयानों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने होंगे:
- भारत को अपनी घोषित परियोजनाओं को समय पर पूरा करना होगा
- तीस्ता जल विवाद जैसे पुराने मुद्दों का समाधान जल्द निकालना होगा
- जापान, आसियान देशों और क्वाड (Quad) साझेदारों के साथ मिलकर बांग्लादेश में पारदर्शी और टिकाऊ निवेश की पेशकश करनी होगी
बांग्लादेश बना ‘जियोपॉलिटिकल पिवट स्टेट’
अब बांग्लादेश केवल भारत का पड़ोसी देश या द्विपक्षीय साझेदार नहीं रहा। वह धीरे-धीरे एक ‘भू-राजनीतिक केंद्र (Geopolitical Pivot State)’ बनता जा रहा है, जहाँ चीन और भारत दोनों के हित टकरा रहे हैं।
चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और क्षेत्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।