चीन ने अफ्रीकी देशों को एक बहुत बड़ा आर्थिक तोहफा दिया है। 1 मई 2026 से चीन में अफ्रीका के ज्यादातर देशों से आने वाले माल पर कोई टैरिफ (शुल्क) नहीं लगेगा। यानी जीरो टैरिफ! यह फैसला चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अफ्रीकी संघ (African Union) को संदेश देते हुए घोषित किया।
क्या है यह नई नीति? आसान भाषा में समझें
पहले यह छूट सिर्फ 33 गरीब अफ्रीकी देशों को मिलती थी। अब इसे बढ़ाकर 53 देशों तक कर दिया गया है। अफ्रीका में कुल 54 देश हैं, लेकिन इस्वातिनी (Eswatini, पहले स्वाजीलैंड) को बाहर रखा गया है।
क्यों? क्योंकि इस्वातिनी ताइवान को अलग देश मानता है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। चीन ऐसे देशों के साथ अच्छे संबंध नहीं रखता।

चीन को क्या फायदा?
यह कदम चीन की रणनीति का हिस्सा है:
- बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत अफ्रीका में पहले से ही सड़कें, बंदरगाह और रेलवे बना रहा है चीन। अब सस्ता कच्चा माल (जैसे खनिज, कृषि उत्पाद) आसानी से आएगा।
- अफ्रीका को अपना सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनाने का प्लान।
- अमेरिका और यूरोप की तुलना में खुद को “दोस्त” के रूप में दिखाना, क्योंकि वे टैरिफ लगाते हैं।

भारत के लिए क्यों चिंता की बात?
भारत के लिए यह “खतरे की घंटी” है। देखिए कैसे:
- निर्यात घट सकता है: अफ्रीका भारत का चौथा सबसे बड़ा बाजार है। हम वहां दवाइयां, कारें, कपड़े और मशीनरी बेचते हैं। अब अफ्रीकी देश चीन को ज्यादा सामान भेजेंगे, तो भारत कम बेच पाएगा।
- कच्चा माल महंगा हो सकता है: भारत को अफ्रीका से तांबा, कोबाल्ट, सोना और दुर्लभ खनिज चाहिए – EV कारें और सोलर पैनल बनाने के लिए। चीन इन पर लॉन्ग-टर्म डील कर सकता है।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: चीन को सस्ता माल मिलेगा, तो उसके प्रोडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। दुनिया के बाजार में भारतीय सामान मुश्किल में पड़ सकता है।
- समुद्री रास्ते पर नजर: चीन अफ्रीका के बंदरगाहों (जैसे जिबूती) में निवेश कर रहा है। व्यापार बढ़ने से हिंद महासागर में चीनी जहाज ज्यादा आएंगे – भारत की सुरक्षा के लिए चिंता।

भारत क्या कर सकता है?
भारत पहले से अफ्रीका के साथ मजबूत संबंध बना रहा है – G20 में अफ्रीकी संघ को सदस्य बनवाया, वैक्सीन और तकनीक दी। अब भारत को और तेजी से कदम उठाने चाहिए:
- अफ्रीका के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर काम।
- ज्यादा निवेश, जैसे तेल और खनिज में।
- “वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ” के रूप में अपनी लीडरशिप दिखानी होगी।
यह घोषणा अफ्रीकी संघ के सम्मेलन से ठीक पहले आई, जो चीन की डिप्लोमेसी की मिसाल है। अब देखना होगा कि भारत इस चुनौती का कैसे जवाब देता है।