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हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस चर्चा का केंद्र बिंदु भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), यूक्रेन संकट, और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEEEC) रहा। यह बातचीत भारत और ईयू के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर तब जब हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ की घोषणा की थी।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) क्या है?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दो या अधिक देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक समझौता है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं पर आयात शुल्क (टैरिफ) को कम या शून्य किया जाता है। इससे उत्पादों की कीमतें कम होती हैं, बाजारों तक पहुंच बढ़ती है, और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है। इससे रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था में वृद्धि को बल मिलता है। भारत ने अब तक 13 देशों या क्षेत्रों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जिनमें आसियान, जापान, दक्षिण कोरिया और सॉफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता) शामिल हैं।
भारत-ईयू FTA का महत्व
यूरोपीय संघ, जिसमें 27 देश शामिल हैं, एक विशाल और आर्थिक रूप से मजबूत क्षेत्र है। भारत के साथ FTA होने से दोनों पक्षों को व्यापक लाभ हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि भारत यूरोपीय देशों से 10 लाख रुपये की कार आयात करता है, जिस पर 100% टैरिफ लगता है, तो उसकी कीमत 20 लाख रुपये हो जाती है। लेकिन FTA के तहत यदि टैरिफ शून्य या 20% हो, तो कार की कीमत 12 लाख रुपये तक कम हो सकती है। इससे बाजार का विस्तार होगा और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी।
भारत को इस समझौते से विशेष रूप से लाभ होगा, क्योंकि यह आईटी सेवाओं और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति रखता है। कम टैरिफ के साथ भारतीय उत्पादों और सेवाओं की यूरोपीय बाजारों में पहुंच बढ़ेगी। भारत का आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार पहले ही FTA के जरिए बढ़ा है। उदाहरण के लिए, 2011 से 2021 के बीच आसियान के साथ भारत का व्यापार 34.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 40.6 बिलियन डॉलर हो गया।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEEEC)
बातचीत का एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु IMEEEC रहा। यह कॉरिडोर भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसके दो हिस्से हैं:
- पूर्वी हिस्सा: भारत के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (नवी मुंबई), कांडला पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट को जलमार्ग के जरिए यूएई के जेबेल अली पोर्ट से जोड़ा जाएगा। इसके बाद यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल के हाइफा पोर्ट तक रेल मार्ग से कनेक्टिविटी होगी।
- उत्तरी हिस्सा: हाइफा पोर्ट से ग्रीस के पेरियस पोर्ट तक जलमार्ग के जरिए कनेक्शन होगा, जिसे इटली के मेसिना और फ्रांस के मार्सिले तक विस्तारित किया जाएगा।
इस कॉरिडोर में न केवल रेल, सड़क और जलमार्ग शामिल हैं, बल्कि बिजली केबल, हाइड्रोजन पाइपलाइन और हाई-स्पीड डेटा केबल भी होंगे। यह एक संपूर्ण संचार तंत्र स्थापित करेगा। 2023 की G20 बैठक में भारत, अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, इटली, फ्रांस, जर्मनी और ईयू ने इस परियोजना के लिए समझौता किया था। इसे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।
भविष्य की योजनाएँ
अगले 5-6 महीनों में भारत और ईयू के बीच कम से कम 10 बैठकें होंगी। 2026 की शुरुआत में एक शिखर बैठक भी हो सकती है, जिसके बाद भारत-ईयू FTA लागू हो सकता है। यह समझौता भारत के व्यापार और आर्थिक विकास के लिए एक नया अध्याय शुरू कर सकता है।
यह समझौता और कॉरिडोर भारत को वैश्विक व्यापार में एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।