भारत के यूनियन बजट का विकास: ब्रिटिश काल से आधुनिक दौर तक
भारत का बजट हर साल देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी? आज हम आपको बताते हैं बजट की पूरी कहानी, आसान भाषा में। ब्रिटिश समय से लेकर आज के डिजिटल बजट तक, हर बदलाव को कवर करते हुए। यह कहानी छोटी शुरुआत से लाखों करोड़ तक के सफर की है।
ब्रिटिश काल में बजट की शुरुआत
भारत में बजट की परंपरा ब्रिटिश समय से शुरू हुई। सबसे पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया। इसे जेम्स विल्सन ने पेश किया, जो उस समय ब्रिटिश भारत के वित्त मंत्री थे। वे एक स्कॉटिश अर्थशास्त्री थे और “द इकोनॉमिस्ट” मैगजीन के संस्थापक भी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश सरकार की कमाई कम हो गई थी, इसलिए उन्होंने अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए यह बजट लाया। इसमें पहली बार इनकम टैक्स लगाया गया (सालाना 200 रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर)।

स्वतंत्र भारत में बजट की शुरुआत
स्वतंत्र भारत का पहला यूनियन बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया। इसे आर. के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया, जो स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री थे। यह एक अंतरिम बजट था, जो सिर्फ साढ़े 7 महीने के लिए था। उस समय कुल खर्च लगभग 197 करोड़ रुपये था, जिसमें से 47% रक्षा पर खर्च था। देश विभाजन की वजह से आर्थिक मुश्किलें थीं, दंगे हो रहे थे और संसाधन कम थे।
बाद में, गणतंत्र भारत का पहला पूर्ण बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया।

यह परंपरा ब्रिटिश “बजट” शब्द से आई है, जो चमड़े के बैग से जुड़ी है। आज भी जारी है। आज के बजट जैसे 2026 का लाखों करोड़ के होते हैं, लेकिन शुरुआत छोटी और चुनौतीपूर्ण थी।
समय के साथ बजट में आए बदलाव
भारत के यूनियन बजट में सालों से कई बदलाव आए हैं। शुरुआत में यह छोटा और ब्रिटिश प्रभाव वाला था, लेकिन आज दुनिया के सबसे बड़े बजटों में से एक है। मुख्य अंतर समय, आकार, प्रस्तुति, प्रक्रिया और फोकस में हैं। आइए देखें प्रमुख बदलाव:
1. प्रस्तुति का समय
1947 से 1998 तक बजट फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर शाम 5 बजे पेश होता था। यह ब्रिटिश परंपरा थी, ताकि ब्रिटिश संसद से मैच करे।
1999 से यशवंत सिन्हा ने पहली बार सुबह 11 बजे पेश किया। 2001 से यह स्थायी हो गया, ताकि भारतीय बाजारों से बेहतर तालमेल हो।
2017 से अरुण जेटली ने तारीख 1 फरवरी कर दी। वजह थी कि बजट अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष से पहले लागू हो सके। अब हर साल 1 फरवरी को 11 बजे पेश होता है।
2026 का खास: 1 फरवरी 2026 रविवार है, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार रविवार को बजट पेश होगा। पहले वीकेंड से बचते थे।
2. बजट का आकार और स्केल
1947-48 का पहला अंतरिम बजट: कुल खर्च ≈ 197 करोड़ रुपये, 47% रक्षा पर। राजस्व कम, विभाजन और दंगों से मुश्किलें।
1950-60 के दशक: कुछ सौ करोड़ से शुरू, प्लान्ड इकोनॉमी और 5-वर्षीय योजनाओं पर फोकस।
1991: उदारीकरण के बाद बड़ा हुआ, FDI और निजीकरण शुरू।
आज (2025-26 और 2026): कुल बजट 45-50 लाख करोड़ रुपये के आसपास। कैपिटल एक्सपेंडिचर (इंफ्रा) पर जोर, फिस्कल डेफिसिट कंट्रोल, टैक्स रिफॉर्म्स, और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य।
3. प्रस्तुति का फॉर्मेट और तरीका
पुराना: ब्रिटिश स्टाइल का चमड़े का ब्रीफकेस लेकर वित्त मंत्री संसद जाते थे। पेपर-बेस्ड, लंबी स्पीच।
2019: निर्मला सीतारमण ने पहली बार बही-खाता इस्तेमाल किया – भारतीय संस्कृति का प्रतीक।
2021 से: पूरी तरह पेपरलेस। वित्त मंत्री डिजिटल टैबलेट (मेड इन इंडिया) पर पढ़ती हैं, बही-खाता स्टाइल कवर में। COVID और डिजिटल इंडिया की वजह से। दस्तावेज ऑनलाइन जारी, लॉक-इन पीरियड 5 दिन रह गया।
स्पीच की लंबाई: पहले 1-2 घंटे, अब कभी 2.5+ घंटे (जैसे 2020-21 सबसे लंबी)। पार्ट A (पॉलिसी) और पार्ट B (टैक्स) में विभाजन, लेकिन 2026 में पार्ट B पर ज्यादा फोकस की उम्मीद।

4. अन्य प्रमुख बदलाव
- रेलवे बजट का विलय (2017): पहले 1924 से अलग रेलवे बजट पेश होता था, रेल मंत्री द्वारा। 2017 में अरुण जेटली ने इसे यूनियन बजट में मिला दिया। वजह: प्रशासनिक जटिलता कम करना, बेहतर समन्वय।
- प्लान vs नॉन-प्लान खर्च का अंत (2017): पहले प्लान (5-वर्षीय योजनाएं) और नॉन-प्लान (वेतन, सब्सिडी) अलग थे। अब सिर्फ कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। बजट ज्यादा पारदर्शी हुआ।
- GST का प्रभाव (2017 से): GST लागू होने से टैक्स स्ट्रक्चर बदला। पहले कई टैक्स अलग थे, अब GST केंद्रीय हिस्सा। टैक्स सिस्टम आसान हुआ।
- भाषा और पहुंच (1955 से): 1955 में पहली बार अंग्रेजी और हिंदी दोनों में छपा (सी.डी. देशमुख के समय)। अब क्षेत्रीय भाषाओं में सारांश, डिजिटल रूप से उपलब्ध।
- हलवा समारोह और लॉक-इन: बजट प्रिंटिंग शुरू होने से पहले हलवा बनाने की परंपरा। वित्त मंत्री खुद बांटती हैं – कर्मचारियों के लिए उत्सव। लॉक-इन में कोई बाहर नहीं जा सकता, जानकारी लीक न हो। अभी भी जारी, भले पेपरलेस हो।

- डिजिटल बदलाव: पहले सिर्फ संसद में, अब प्री-बजट कंसल्टेशन (उद्योग, किसान से सुझाव)। डॉक्यूमेंट्स डिजिटल, ऐप्स पर लाइव। वोट ऑन अकाउंट चुनाव वर्ष में।
- फोकस और थीम में बदलाव:
- 1947-80: रक्षा, रिफ्यूजी, प्लान्ड इकोनॉमी, गरीबी हटाओ।
- 1991: LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण)।
- 2000s: इंफ्रा (गोल्डन क्वाड्रिलेटरल), फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी।
- 2014 से: आत्मनिर्भर भारत, PLI स्कीम्स, न्यू टैक्स रिजीम (2020), कैपिटल एक्सपेंडिचर, विकसित भारत 2047।
संक्षेप में, बजट अब सिर्फ खर्च-आय का बयान नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को दिशा देने का बड़ा टूल है। 1947 में 197 करोड़ से आज लाखों करोड़ तक का सफर भारत की आर्थिक यात्रा दिखाता है। 2026 का बजट पहली बार रविवार को पेश होगा!