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भारत इस समय एक गंभीर उर्वरक संकट का सामना कर रहा है, जिसके कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती के लिए जरूरी उर्वरकों की कमी ने किसानों को लंबी-लंबी कतारों में खड़े होने और उर्वरकों के लिए जद्दोजहद करने पर मजबूर कर दिया है। यह संकट मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन के कारण पैदा हुआ है, जिसका असर खेती, खाद्य सुरक्षा और बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ा उर्वरकों का संकट?
इस साल देश में अच्छा मानसून रहा, खासकर उत्तर भारत में बारिश में बढ़ोतरी देखी गई। इसने किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके चलते चावल और मक्के की बुवाई में क्रमशः 7.6% और 12% की वृद्धि हुई। ये दोनों फसलें ऐसी हैं, जिन्हें यूरिया जैसे नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों की बहुत जरूरत होती है। अच्छे मानसून और सिंचाई की सुविधा ने किसानों को और अधिक उर्वरक इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।
लेकिन दूसरी तरफ, उर्वरकों की आपूर्ति में भारी कमी आई है। यूरिया का घरेलू उत्पादन पिछले साल के 102.1 लाख टन से घटकर 93.6 लाख टन हो गया है। डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) का उत्पादन भी स्थिर है, लेकिन इसका आयात कम हो गया है, क्योंकि चीन ने अपने निर्यात पर रोक लगा दी है। यूरिया के आयात में भी कमी आई है। नतीजतन, उर्वरकों का स्टॉक आधा रह गया है—यूरिया का स्टॉक अब केवल 37.2 लाख टन है, जो पिछले साल की तुलना में बहुत कम है।
क्या हो सकता है असर?
यह संकट खरीफ फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं, और अगर उत्पादन में कमी आई तो भारतीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है। खासकर, अगर अमेरिका जैसे देश भारत पर टैरिफ लगाते हैं, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।
क्या है समाधान?
इस संकट से निपटने के लिए कुछ कदम सुझाए गए हैं:
- बेहतर योजना: मानसून और फसल पैटर्न के आधार पर उर्वरकों की मांग का पहले से अनुमान लगाना चाहिए।
- अग्रिम भंडारण: उर्वरकों का पहले से स्टॉक रखने के लिए बेहतर गोदाम और भंडारण सुविधाएं बनानी होंगी।
- वैकल्पिक उर्वरक: यूरिया के बजाय अमोनियम सल्फेट या एनपीकेएस जैसे उर्वरकों को बढ़ावा देना चाहिए।
- आयात बढ़ाना: वैश्विक साझेदारी के जरिए आयात को सुरक्षित करना और किसी एक देश पर निर्भरता कम करनी होगी।
- किसानों का भरोसा: किसानों को यह यकीन दिलाना जरूरी है कि उनकी उर्वरक जरूरतें पूरी होंगी, ताकि जमाखोरी से बचा जा सके।
आगे की राह
अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट न केवल किसानों की आजीविका को प्रभावित करेगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को भी खतरे में डाल सकता है। सरकार और संबंधित विभागों को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है ताकि किसानों को राहत मिले और खेती का काम सुचारू रूप से चल सके।