आजकल मौसम बदल रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है। निर्माण का काम भी इसमें बड़ा रोल प्ले करता है। लेकिन अच्छी खबर है! भारत और जर्मनी में कुछ स्मार्ट लोग पुरानी तरीकों को छोड़कर नई, हरी-भरी तकनीक ला रहे हैं। फसल के बेकार हिस्सों से ईंटें बनाना, मिट्टी को मजबूत बनाना – ये सब क्लाइमेट चेंज से लड़ने के हथियार हैं। आइए जानें इन प्रयासों के बारे में, आसान भाषा में।
भारत में फसल कचरे से ‘हरी ईंटें’ गोवा में एक स्टार्टअप ‘ग्रीनजैम्स’ ने कमाल कर दिया है। वे गेहूं, धान के भूसे और कपास के डंठलों जैसे फसल के कचरे से ईंटें बना रहे हैं। इनकी खास चीज है – ‘एग्रोक्रेट’ नाम का बायो कंक्रीट। ये दुनिया का पहला वेरिफाइड कार्बन नेगेटिव कंक्रीट है! मतलब, ये न सिर्फ CO2 नहीं छोड़ता, बल्कि उसे सोख भी लेता है। स्टील फैक्ट्री के बेकार माल को भी इसमें मिलाते हैं। नतीजा? पारंपरिक सीमेंट कंक्रीट से सस्ता और मजबूत।

पुरानी समस्या: भट्टियां और प्रदूषण पुरानी ईंटें बनाने के लिए उन्हें 1000 डिग्री गर्म भट्टियों में पकाया जाता है। भारत में एक लाख से ज्यादा ईंट भट्टियां हर साल ढाई करोड़ टन कोयला जला रही हैं। ये धुआं हवा को जहरीला बना देता है। 2070 तक भारत का नेट जीरो लक्ष्य है, लेकिन ये भट्टियां बड़ी रुकावट हैं।

तमिलनाडु की मिट्टी वाली ईंटें तमिलनाडु के आर्किटेक्ट कार्तिकेयन पिछले 16 साल से मिट्टी की ईंटें बना रहे हैं। इनमें 90% मिट्टी और बस 10% चूना-सीमेंट मिलाते हैं। भट्टी की जरूरत नहीं – बस कुछ हफ्ते प्राकृतिक सूखने दें। प्रदूषण जीरो! अब मध्यवर्ग के लोग भी इन ‘मिट्टी के घरों’ की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। गर्मी में ठंडा, सर्दी में गर्म – परफेक्ट!

जर्मनी का मिट्टी का हाई-टेक जादू जर्मनी में रिसर्चर्स क्रिस्टियान गैथ और माइकल क्रेत्जमन निर्माण साइटों से निकली बेकार मिट्टी को हाई-टेक मटेरियल में बदल रहे हैं। उन्होंने मिट्टी को पानी से बचाने और दरारें रोकने के तरीके खोजे हैं। अभी जर्मनी में सिर्फ 1% इमारतें मिट्टी की हैं, लेकिन ये काम तेजी से बढ़ रहा है।

इनका फायदा: पैसे बचाओ, प्रकृति बचाओ! ये नई ईंटें और एग्रोक्रेट घरों को इंसुलेटेड बनाते हैं। गर्मी में AC की जरूरत कम, सर्दी में हीटर कम। बिजली का बिल दो-तिहाई तक घट सकता है! प्लस, ये पर्यावरण को भी राहत देते हैं। ग्रीनजैम्स का दावा है कि अगर सब एग्रोक्रेट यूज करें तो AQI 45% तक कम हो सकता है।

भविष्य उज्ज्वल: कंक्रीट से मुक्ति एग्रोक्रेट थोड़ा महंगा है, लेकिन निवेशक और लोग इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। दोनों देशों के एक्सपर्ट कहते हैं – कंक्रीट पर निर्भरता कम करो। ज्यादा टिकाऊ, सस्ते और ग्रीन घर बनाओ। भारत में मिट्टी के घर अब फैशन में हैं, जर्मनी में रिसर्च तेज। ये बदलाव न सिर्फ इमारतें, बल्कि पूरा ग्रह बदल सकता है!