बांग्लादेश में युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद एक बार फिर ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का मुद्दा चर्चा में आ गया है। हादी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा नक्शा शेयर किया था, जिसमें भारत के कई हिस्से – जैसे पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य, बिहार और ओडिशा के कुछ इलाके – को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था। इस नक्शे ने भारत में गुस्सा पैदा किया और पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया।
क्यों है ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ चर्चा में?
हादी, जो 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे और शेख हसीना सरकार के खिलाफ थे, को चुनाव प्रचार के दौरान गोली मार दी गई। इलाज के लिए सिंगापुर ले जाए जाने के बाद उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादी ने ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के नक्शे सर्कुलेट किए थे, जो भारत की संप्रभुता को चुनौती देते हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में असम में गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा अनावरण के दौरान पुरानी बात याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 1946 में असम को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में शामिल करने की योजना थी, लेकिन बोरदोलोई ने इसका विरोध किया और असम को बचाया।
ऐतिहासिक जड़ें क्या हैं?
यह विचार बहुत पुराना है।
- 1905 का बंगाल विभाजन: ब्रिटिशों ने पूर्वी बंगाल और असम को एक प्रांत बनाया था, जिसे कुछ कट्टरपंथी आज भी ‘प्राकृतिक इकाई’ मानते हैं। 1911 में इसे रद्द कर दिया गया।
- 1946 की कैबिनेट मिशन योजना: भारत को तीन ग्रुप्स में बांटने का प्रस्ताव था। ग्रुप सी में बंगाल और असम को रखा गया था, जो मुस्लिम बहुल था। असम के नेता गोपीनाथ बोरदोलोई ने गांधी जी के समर्थन से इसका विरोध किया और असम को अलग रखा।
- संयुक्त बंगाल योजना: 1947 में एक अविभाजित बंगाल बनाने की कोशिश हुई, लेकिन कांग्रेस और हिंदू महासभा ने इसे ठुकरा दिया।
ये सभी योजनाएं बहुत पहले खारिज हो चुकी हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हें आधार बनाकर पुराने नक्शे प्रचारित करते हैं।
भारत के लिए क्यों चिंता की बात?
ऐसे नक्शे भारत के ‘चिकन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर को निशाना बनाते हैं। यह सिर्फ 22-25 किलोमीटर चौड़ा गलियारा है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ता है। अगर इसमें कोई समस्या हुई, तो पूर्वोत्तर अलग-थलग पड़ सकता है।
स्रोतों के अनुसार, ये नक्शे ज्यादातर कट्टरपंथी या राष्ट्रवादी सोच वाले लोग शेयर करते हैं। बांग्लादेश सरकार ने कई बार कहा है कि वह ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करती। कुछ मामलों में तो इन्हें ऐतिहासिक प्रदर्शनियों का हिस्सा बताया गया।
उपमा से समझें
इसे ऐसे समझिए जैसे कोई पुराने घर के खारिज हो चुके ब्लूप्रिंट को दिखाकर दावा करे कि यह मेरा है, जबकि घर की रजिस्ट्री और सीमाएं सालों पहले कानूनी तौर पर तय हो चुकी हैं। ऐसे दावे सिर्फ झगड़ा बढ़ाते हैं, हकीकत नहीं बदलते।
पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे भ्रामक नक्शे सिर्फ पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ाते हैं। दोनों देशों को शांति और सहयोग पर फोकस करना चाहिए।