भारत के संविधान के विभिन्न मसौदों ने भारत को अलग-अलग दृष्टिकोणों और विचारधाराओं के साथ परिकल्पित किया। 1895 से 1948 के बीच प्रस्तावित मसौदों में उदारवाद, गांधीवादी विकेंद्रीकरण, समाजवाद और अन्य विचारधाराओं के तत्व दिखाई देते हैं। नीचे विभिन्न मसौदों और उनकी परिकल्पनाओं का संक्षिप्त विवरण हिंदी में दिया गया है:
1. 1895: स्वराज विधेयक (एनी बीसेंट)
- परिकल्पना: यह मसौदा भारत को एक स्वशासित राष्ट्रमंडल के रूप में देखता था, जो ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत स्वायत्तता चाहता था।
- विशेषताएं:
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विवेक की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, एकत्र होने की स्वतंत्रता जैसे सात मूल अधिकारों की मांग।
- लिंग आधारित भेदभाव का विरोध और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पर जोर।
- भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वायत्तता के साथ एक समान भागीदार के रूप में देखा गया।
- प्रभाव: यह मसौदा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआती मांगों को दर्शाता था, जो नागरिक अधिकारों और समानता पर केंद्रित था।
2. 1928: नेहरू रिपोर्ट
- परिकल्पना: भारत को एक स्वायत्त डोमिनियन के रूप में परिकल्पित किया गया, जिसमें संवैधानिक ढांचे के तहत पूर्ण स्वशासन की मांग थी।
- विशेषताएं:
- मौलिक अधिकारों का एक विधेयक प्रस्तावित, जिसमें बोलने की स्वतंत्रता, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता शामिल थी।
- एक संसदीय प्रणाली की वकालत, जिसमें केंद्र और प्रांतों के बीच शक्ति का बंटवारा था।
- धर्मनिरपेक्षता और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों पर जोर।
- प्रभाव: इसने भारत के लिए एक लिखित संविधान की नींव रखी और स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती दी।
3. 1935: भारत सरकार अधिनियम
- परिकल्पना: यह ब्रिटिश शासन के तहत भारत को सीमित स्वशासन देने का प्रयास था, जिसे भारत के संविधान का मूल आधार माना जाता है।
- विशेषताएं:
- प्रांतीय स्वायत्तता और एक संघीय ढांचे की शुरुआत।
- केंद्र में एक द्विसदनीय विधायिका की स्थापना।
- हालांकि, यह पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान नहीं करता था और ब्रिटिश नियंत्रण को बनाए रखता था।
- प्रभाव: इसने संविधान सभा के गठन और बाद के संवैधानिक ढांचे के लिए आधार प्रदान किया।
4. 1946-47: कैबिनेट मिशन और बी.एन. राव का मसौदा
- परिकल्पना: भारत को एक स्वतंत्र, एकीकृत गणराज्य के रूप में देखा गया, जिसमें संघीय ढांचा और मौलिक अधिकार शामिल थे।
- विशेषताएं:
- बी.एन. राव ने अक्टूबर 1947 में एक प्रारंभिक मसौदा तैयार किया, जिसमें 243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियां थीं।
- इसमें मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व, और केंद्र-राज्य संबंधों का प्रावधान था।
- एक मजबूत केंद्रीकृत संघ की परिकल्पना, जिसमें राज्यों को कुछ स्वायत्तता दी गई।
- प्रभाव: यह मसौदा संविधान सभा की चर्चाओं के लिए आधार बना और अंतिम संविधान का प्रारूप तैयार करने में महत्वपूर्ण था।
5. 1947-49: संविधान सभा का मसौदा (डॉ. बी.आर. आंबेडकर)
- परिकल्पना: भारत को एक प्रभुत्वसंपन्न, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिकल्पित किया गया, जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता पर आधारित था।
- विशेषताएं:
- मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12-35), नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36-51), और बाद में मौलिक कर्तव्यों (1976 में जोड़े गए) का समावेश।
- एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका, संसदीय प्रणाली, और संघीय ढांचे की स्थापना।
- धर्मनिरपेक्षता, समानता और सामाजिक न्याय पर जोर।
- उद्देशिका में भारत को एक प्रभुत्वसंपन्न, समाजवादी (1976 में जोड़ा गया), पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया।
- प्रभाव: यह अंतिम संविधान बना, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और भारत की शासन व्यवस्था का आधार बना।
6. गांधीवादी दृष्टिकोण (विकेंद्रीकरण)
- परिकल्पना: गांधीवादी विचारकों ने भारत को एक विकेंद्रित, ग्राम आधारित गणराज्य के रूप में देखा, जहां स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज) पर जोर था।
- विशेषताएं:
- ग्राम पंचायतों को शक्ति प्रदान करने और आत्मनिर्भरता पर जोर।
- केंद्रीकृत शासन के बजाय स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने की वकालत।
- प्रभाव: हालांकि यह दृष्टिकोण पूर्ण रूप से लागू नहीं हुआ, 1992 के 73वें और 74वें संशोधनों ने पंचायती राज और नगर पालिकाओं को संवैधानिक मान्यता दी।
7. समाजवादी दृष्टिकोण
- परिकल्पना: कुछ मसौदों, विशेष रूप से 1940 के दशक में, ने समाजवादी सिद्धांतों पर आधारित भारत की परिकल्पना की, जहां आर्थिक समानता और संसाधनों का न्यायसंगत वितरण महत्वपूर्ण था।
- विशेषताएं:
- अनुच्छेद 39 जैसे नीति निदेशक तत्वों में धन और संसाधनों के केंद्रीकरण को रोकने का प्रावधान।
- सामाजिक क्रांति और कल्याणकारी राज्य की स्थापना पर जोर।
- प्रभाव: समाजवादी विचार 1976 के 42वें संशोधन में उद्देशिका में “समाजवादी” शब्द के जोड़े जाने के साथ और मजबूत हुए।
प्रमुख अंतर और समानताएं
- उदारवाद बनाम समाजवाद: प्रारंभिक मसौदे (जैसे नेहरू रिपोर्ट) उदारवादी सिद्धांतों पर केंद्रित थे, जबकि बाद के मसौदों में समाजवादी और कल्याणकारी तत्व शामिल हुए।
- केंद्रीकरण बनाम विकेंद्रीकरण: गांधीवादी दृष्टिकोण विकेंद्रीकरण पर जोर देता था, जबकि आंबेडकर और राव के मसौदों ने एक मजबूत केंद्रीकृत संघ की परिकल्पना की।
- धर्मनिरपेक्षता: सभी मसौदों में धर्मनिरपेक्षता एक प्रमुख तत्व था, जिसे 1976 में उद्देशिका में स्पष्ट रूप से जोड़ा गया।
- मौलिक अधिकार: स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर, सभी मसौदों ने नागरिकों के अधिकारों पर जोर दिया, जो अंतिम संविधान में भाग III के रूप में शामिल हुए।