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भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का बड़ा लक्ष्य रखा है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने 11 सितंबर 2025 को घोषणा की कि भारत 2028 तक सौर ऊर्जा के लिए पूरी तरह से स्वदेशी बन जाएगा। इसका मतलब है कि सौर पैनल बनाने से लेकर सौर ऊर्जा सिस्टम स्थापित करने तक, सब कुछ भारत में ही होगा। इससे न सिर्फ विदेशों से आयात कम होगा, बल्कि सस्ती बिजली, नौकरियां और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।
क्या है लक्ष्य?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन से बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है। अच्छी खबर यह है कि 251.5 गीगावाट से ज्यादा क्षमता पहले ही हासिल कर ली गई है, जो तय समय से 5 साल पहले है। अब सरकार का फोकस सौर ऊर्जा के लिए जरूरी सभी चीजें, जैसे सिलिकॉन, वेफर, सौर सेल और सौर पैनल, भारत में ही बनाने पर है।
कैसे बनेगा सौर ऊर्जा का पारिस्थितिक तंत्र?
सौर ऊर्जा बनाने के लिए कई चरण होते हैं:
- सिलिकॉन: यह सौर पैनल का मुख्य हिस्सा है, जो सूरज की रोशनी को बिजली में बदलता है।
- इंगट और वेफर: सिलिकॉन से इंगट बनते हैं, जिन्हें पतली स्लाइस में काटकर वेफर बनाया जाता है।
- सौर सेल और पैनल: वेफर से सौर सेल बनते हैं, और कई सेल मिलकर सौर पैनल बनाते हैं।
- सौर फार्म: कई पैनल मिलकर सौर फार्म बनाते हैं, जो बिजली को ग्रिड तक पहुंचाते हैं।
इन सभी चरणों को भारत में ही पूरा करने से नौकरियां बढ़ेंगी, निवेश आएगा और भारत सौर ऊर्जा में विश्व में अग्रणी बन सकता है।
आत्मनिर्भरता के फायदे:
- सस्ती बिजली और ऊर्जा सुरक्षा: विदेशों से आयात कम होने से पैसा बचेगा और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी।
- नौकरियां और विकास: सौर विनिर्माण और अनुसंधान से लाखों नौकरियां पैदा होंगी।
- पर्यावरण की रक्षा: सौर ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जिससे पर्यावरण को लाभ होगा।
- वैश्विक महाशक्ति: भारत सौर ऊर्जा के उपकरण निर्यात करके विश्व में अपनी पहचान बनाएगा।
सरकार की योजनाएं:
सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: इस योजना के तहत 1 करोड़ घरों को छत पर सौर पैनल लगाकर हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी। इसके लिए ₹75,000 करोड़ का बजट है।
- पीएम कुसुम योजना: यह योजना किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई पंप चलाने में मदद करती है। मार्च 2026 तक 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है।
- पीएलआई योजना: यह योजना कंपनियों को भारत में सौर उपकरण बनाने के लिए वित्तीय मदद देती है।
- कम जीएसटी: सौर उपकरणों पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% किया गया है, जिससे लागत कम हुई है।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस: सौर ऊर्जा क्षेत्र में काम शुरू करने के लिए प्रक्रियाएं आसान की गई हैं।
आगे की राह:
इन योजनाओं और लक्ष्यों के साथ भारत 2028 तक सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। यह न केवल भारत को स्वच्छ ऊर्जा का नेतृत्व देगा, बल्कि देश को आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से भी मजबूत करेगा।
भारत का सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने का सपना अब हकीकत की ओर बढ़ रहा है। सरकार की योजनाएं, निवेश और तकनीकी प्रगति भारत को स्वच्छ ऊर्जा की दुनिया में एक नई पहचान दिलाएंगे।