भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बाद यह डील फाइनल हुई। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार आसान होने की उम्मीद है, लेकिन कुछ लोग इसे भारत के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं। आइए जानते हैं इस डील के मुख्य पहलू, टैरिफ में बदलाव और इसके संभावित प्रभाव क्या हैं। सारी जानकारी स्रोतों पर आधारित है।

ट्रेड डील का ऐलान और टैरिफ में बदलाव
पिछले 11 महीनों से दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर झगड़ा चल रहा था। अब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि डील हो गई है। अमेरिका ने भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। लेकिन कुछ स्रोतों के मुताबिक, पहले यह 25% था और अब 18% हो गया है। हालांकि, प्यूनेटिव टैरिफ (25%) हटने की पूरी स्पष्टता नहीं है, इसलिए प्रभावी टैरिफ अभी 43% तक हो सकता है।
दूसरी तरफ, भारत अब अमेरिका से आने वाले सामान पर 0% टैक्स लगाएगा। पहले यह औसत 17% था और कृषि क्षेत्र में 30% से 150% तक। पहले भारत अमेरिका को निर्यात पर सिर्फ 5.25% टैरिफ देता था, जो अब बढ़कर 18% हो गया है। पहली नजर में यह भारत की जीत लगती है, लेकिन असल में टैरिफ बढ़ गया है। डील का पूरा ब्यौरा अभी नहीं आया है।
भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र पर प्रभाव
यह समझौता भारतीय किसानों के लिए चिंता का विषय है। अमेरिकी दूध, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सोया और मक्का अब भारत में 0% टैरिफ पर आएंगे। इससे अमेरिकी सस्ता माल भारतीय बाजार में घुसेगा और स्थानीय किसानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। भारत में डेयरी और कृषि क्षेत्र राजनीतिक और धार्मिक रूप से बहुत संवेदनशील हैं। अमेरिकी कंपनियों की पहुंच या आयात की शर्तों पर अभी पूरी जानकारी नहीं है। विपक्ष इसे किसानों के हितों के खिलाफ बता रहा है।
रूस से तेल खरीद बंद करने का दावा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि पीएम मोदी के अनुरोध पर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अब भारत अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप का दावा है कि इससे यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी। पिछले 3 सालों (40 महीने) में रूस से तेल खरीदने से भारत को 1,53,000 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था। लेकिन भारत की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह डील ‘बाय अमेरिकन’ पहल के तहत है, जहां भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा की ऊर्जा, तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदेगा।

यूरोपीय यूनियन डील का प्रभाव
माना जा रहा है कि भारत की यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ हुई फ्री ट्रेड डील की वजह से अमेरिका पर दबाव पड़ा, जिससे यह समझौता हुआ। EU डील ने अमेरिका को भारत के साथ जल्दी समझौता करने के लिए मजबूर किया।
सरकार और विपक्ष का रुख
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि देश को बहुत फायदा होगा। पीएम मोदी ने इसे दो बड़े लोकतंत्रों के बीच सहयोग और लोगों के लाभ का अवसर कहा। लेकिन राहुल गांधी और विपक्ष ने सवाल उठाए। वे कहते हैं कि यह किसानों के खिलाफ है और अमेरिका अपना फायदा देख रहा है। मुख्य चिंता यह है कि क्या भारत को सच में फायदा हो रहा है या अमेरिका अपना बड़ा हित साध रहा है।
बाजार की प्रतिक्रिया
इस डील की खबर से भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3% का उछाल आया। निवेशक इसे सकारात्मक मान रहे हैं।
अस्पष्टता और भविष्य
ट्रंप के कई दावों पर भारत का रुख स्पष्ट होना बाकी है। डील की पूरी बारीकियां आधिकारिक दस्तावेज आने के बाद ही पता चलेंगी। फिलहाल, यह समझौता दोनों देशों के संबंधों को मजबूत कर सकता है, लेकिन इसके प्रभाव पर नजर रखनी होगी।