भारत के बैंकों में एक नई चिंता की खबर आ रही है। बैंक अब जितना पैसा जमा लेते हैं, उसमें से 81 रुपये तक लोन के रूप में बांट रहे हैं। यह आंकड़ा अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञ इसे बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरे की घंटी बता रहे हैं।

क्या है यह LDR और क्यों हो रही है चिंता?
LDR यानी Loan to Deposit Ratio – आसान भाषा में, बैंक के पास जमा हर 100 रुपये में से कितना रुपये लोन दिया जा रहा है। अभी यह 81% तक पहुंच गया है। मतलब, बैंक ज्यादा से ज्यादा लोन दे रहे हैं, लेकिन जमा (डिपॉजिट) उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही।

समस्या क्या है?
बैंक में जमा पैसा तो कोई भी कभी भी निकाल सकता है। लेकिन लोन लंबे समय के लिए दिए जाते हैं। अगर अचानक बहुत सारे लोग अपना पैसा बैंक से निकालने आ गए, तो बैंक के पास नकदी की कमी हो सकती है। इसे तरलता का जोखिम (Liquidity Risk) कहते हैं।

लोन क्यों इतने तेजी से बढ़ रहे हैं?
- रिटेल लोन का बोलबाला: घर खरीदने के लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, यहां तक कि मोबाइल-लैपटॉप जैसे गैजेट्स के लिए भी लोन।
- कॉर्पोरेट कंपनियां भी ज्यादा कर्ज ले रही हैं।
- देश में क्रेडिट ग्रोथ (कर्ज बढ़ने की रफ्तार) बहुत तेज है।

लेकिन डिपॉजिट क्यों कम हो रही है?
लोग अब बैंक की बचत खाते या FD में पैसा रखने के बजाय:
- म्यूचुअल फंड
- शेयर बाजार
- इंश्योरेंस
- छोटी बचत योजनाओं
में निवेश कर रहे हैं। वजह? महंगाई से बचना और ज्यादा रिटर्न पाना। कोविड के बाद लोग खर्च करना भी ज्यादा पसंद कर रहे हैं, बचत कम।
प्राइवेट बैंक ज्यादा परेशान, सरकारी बैंक थोड़े संभले
निजी बैंकों में स्थिति और गंभीर है। कुछ बैंकों का LDR 90% से 100% तक पहुंच गया है। वहीं सरकारी बैंक थोड़े सतर्क हैं और कम जोखिम ले रहे हैं।
RBI की नजर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस पूरे मामले पर सख्त नजर रख रहा है। बैंकों को ज्यादा डिपॉजिट जुटाने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे उनकी कमाई पर असर पड़ेगा।

तो क्या बैंक डूब जाएंगे?
नहीं! यह सिर्फ एक चेतावनी का संकेत है। बैंकों के बैलेंस शीट अभी मजबूत हैं। NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) यानी खराब लोन भी कम हैं। लेकिन बैलेंस बनाए रखना जरूरी है – न ज्यादा लोन, न कम डिपॉजिट।
बैंकों को अब लोन देने और जमा जुटाने के बीच संतुलन बैठाना होगा। वरना तरलता का यह दबाव आगे चलकर बड़ा रूप ले सकता है। आम निवेशक के लिए सलाह – अपनी बचत को स्मार्ट तरीके से बांटें, लेकिन बैंक खाते को भी नजरअंदाज न करें!