ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव से भारत के रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस साल के बजट में 15% की वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 7.84 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह पिछले साल के 6.1 लाख करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है। यह राशि भारत की जीडीपी का करीब 1.9% है।
बजट का बंटवारा: कहां-कहां खर्च होगा पैसा?
कुल बजट को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, ताकि सेना की हर जरूरत पूरी हो सके:
- सेना के रोजमर्रा के खर्च (3.65 लाख करोड़ रुपये): यह पैसा सैनिकों की तनख्वाह, खाना, ईंधन, रखरखाव और हथियारों पर खर्च होगा।
- नए सामान और प्रोजेक्ट्स (2.19 लाख करोड़ रुपये): नए हथियार, ड्रोन, तकनीक, हवाई रक्षा और सीमा पर सड़कें-इमारतें बनाने के लिए। पिछले साल से इसमें 22% की बढ़ोतरी है।
- पेंशन (1.71 लाख करोड़ रुपये): करीब 28 लाख से ज्यादा रिटायर्ड सैनिकों की पेंशन के लिए।
- सिविल डिफेंस (करीब 28,554 करोड़ रुपये): ISRO, DRDO जैसी महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर।
आधुनिक तकनीक और ड्रोन पर खास ध्यान
ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि आज के युद्ध में ड्रोन कितने जरूरी हैं। पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश के साथ जमीन पर हमला करना बहुत खतरनाक है, क्योंकि वह परमाणु शक्ति वाला देश है। लेकिन ड्रोन से लड़ाई में खतरा कम रहता है, और युद्ध बढ़ने का डर भी नहीं होता।
भारत फ्रांस से 114 नए राफेल विमान खरीदने की तैयारी में है। यह अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील होगी, और इसके लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं।

आत्मनिर्भर भारत: खुद के हथियार बनाने पर जोर
सरकार रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस कर रही है। अब भारत अपनी रक्षा जरूरतों का 65% हिस्सा खुद बना रहा है। 2024 में रक्षा उत्पादन 1.26 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड स्तर छू लिया।
रक्षा निर्यात भी बढ़ा है: 10 साल पहले सिर्फ 1,000 करोड़ रुपये था, जो अब 21,083 करोड़ रुपये हो गया है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडोर बनाए गए हैं, जहां 9,145 करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है।
टैक्स छूट से मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट
स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई छूट दी गई हैं। तेजस मार्क 1 और 2 जैसे एयरक्राफ्ट और जहाज बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। इससे मरम्मत और रखरखाव की लागत कम होगी।
निष्कर्ष: रक्षा बजट में 209% की वृद्धि
पिछले 10 सालों में भारत का रक्षा बजट 209% बढ़ा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जीडीपी का 2% खर्च आदर्श है, और मौजूदा 1.9% इसके काफी करीब है। यह बजट भारत की सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।