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नमस्ते! आज हम बात करेंगे भारत के बाहरी ऋण (External Debt) के बारे में, जो पिछले सात सालों में सबसे तेजी से बढ़ा है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
बाहरी ऋण क्या है?
बाहरी ऋण वह पैसा है, जो भारत की सरकार, कंपनियां, बैंक या लोग विदेशों से उधार लेते हैं। यह पैसा कई तरीकों से लिया जाता है, जैसे:
- सरकारी कर्ज: विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे बड़े संगठनों से।
- निजी कंपनियों का कर्ज: कंपनियां विदेशी बैंकों या बॉन्ड से पैसा लेती हैं।
- एनआरआई जमा: विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भारतीय बैंकों में जमा किया गया पैसा।
- अल्पकालिक व्यापार कर्ज: जो आमतौर पर एक साल में चुकाना होता है।
कितना बढ़ा कर्ज?
- मार्च 2024 में भारत का बाहरी ऋण 668 बिलियन डॉलर था।
- मार्च 2025 तक यह बढ़कर 736 बिलियन डॉलर हो गया।
- यानी एक साल में 67.5 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी, जो 10.1% की रिकॉर्ड वृद्धि है।
- अगर रुपये में देखें, तो यह कर्ज 63 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कम हुई है।
- कर्ज का जीडीपी के साथ अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) भी 18.5% से बढ़कर 19.1% हो गया।
कर्ज क्यों बढ़ा?
- ज्यादा आयात: भारत में कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने का आयात बढ़ा, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ा।
- कंपनियों का विदेशी कर्ज: भारतीय कंपनियां विदेशों से सस्ता कर्ज ले रही हैं।
- रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरने से कर्ज का मूल्य रुपये में ज्यादा दिखता है।
- एनआरआई जमा: विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने बैंकों में ज्यादा पैसा जमा किया।
- विश्वास में बढ़ोतरी: भारत को एक स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशक ज्यादा कर्ज दे रहे हैं।
क्या यह चिंता की बात है?
कुछ बातें चिंता बढ़ाती हैं:
- विदेशी मुद्रा का जोखिम: अगर डॉलर और मजबूत होता है, तो कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा रुपये चाहिए।
- अल्पकालिक कर्ज: कुल कर्ज का 41% हिस्सा ऐसा है, जिसे जल्दी चुकाना पड़ता है। इसके लिए नया कर्ज लेना पड़ सकता है।
- ज्यादा ब्याज: निजी कंपनियों को सरकार की तुलना में ज्यादा ब्याज देना पड़ता है।
- तेजी से बढ़ता कर्ज: भले ही 19.1% का कर्ज-जीडीपी अनुपात ज्यादा नहीं है, लेकिन इसकी तेज वृद्धि पर नजर रखनी होगी।
चिंता कम करने वाले कारण:
- विदेशी मुद्रा भंडार: भारत के पास करीब 700 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो कर्ज का 90% हिस्सा कवर कर सकता है।
- निर्यात और प्रेषण: भारत निर्यात और विदेशों से आने वाले पैसों (रेमिटेंस) से कर्ज चुका सकता है।
- विविध स्रोत: भारत का कर्ज एक जगह से नहीं, बल्कि कई स्रोतों से है।
- मजबूत अर्थव्यवस्था: भारत की अच्छी विकास दर और स्थिरता इसे मजबूत बनाती है।
भारत का बाहरी ऋण बढ़ा है, लेकिन अभी यह चिंता की बात नहीं है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह पैसा सड़क, पुल या अन्य जरूरी परियोजनाओं में लगे, न कि बेकार खर्च में। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार कर्ज पर सख्त नियम लाने की सोच रहे हैं। साथ ही, स्टैंडर्ड एंड पुअर जैसी रेटिंग एजेंसियों ने भारत की रेटिंग सुधारी है, जो दिखाता है कि दुनिया को भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा है।