भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट, जो अहमदाबाद और मुंबई के बीच बन रहा है, अब पहले से ज्यादा महंगा और देर से पूरा होगा। यह प्रोजेक्ट देश की रेल व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाने वाला है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां आई हैं। आइए जानते हैं पूरी कहानी सरल भाषा में।

प्रोजेक्ट की लागत और समय में बड़ा बदलाव
यह बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पहले 1.08 लाख करोड़ रुपये में बनने वाला था, लेकिन अब इसकी लागत बढ़कर करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यानी लागत लगभग दोगुनी हो गई। शुरुआत में इसे 2022 तक पूरा करने का प्लान था, लेकिन अब 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है। मतलब, पूरे 7 साल की देरी हो रही है।
देरी और महंगाई के मुख्य कारण
इस प्रोजेक्ट में देरी होने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है जमीन का मिलना मुश्किल होना। ट्रेन ऊंचे पुलों पर चलेगी, लेकिन स्टेशन, सड़कें और निर्माण के लिए बहुत सारी जमीन चाहिए। ट्रैक को बिल्कुल सीधा रखना पड़ता है, इसलिए सही जमीन चुनना कठिन है।
दूसरा, कानूनी नियमों की वजह से मुआवजा बहुत ज्यादा देना पड़ता है। शहरों में जमीन की कीमत का दो गुना और गांवों में चार गुना। महाराष्ट्र में राजनीतिक विरोध की वजह से भी काम रुका। साथ ही, कोरोना महामारी ने सब कुछ धीमा कर दिया।
यह ट्रेन बनने से अहमदाबाद से मुंबई की यात्रा 16 घंटे से घटकर सिर्फ 4.5 घंटे रह जाएगी। लोगों को काम और परिवार के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
आर्थिक रूप से भी बड़ा फायदा होगा। गुजरात और महाराष्ट्र के बीच लोग आसानी से आ-जा सकेंगे, जिससे छोटे शहरों का विकास बढ़ेगा। मौजूदा रेल ट्रैक खाली होंगे, तो सामान्य ट्रेनें समय पर चलेंगी।
तकनीक के मामले में भारत जापान की मशहूर शिनकानसेन तकनीक सीख रहा है, जो बहुत सुरक्षित है। यह ट्रेन बिजली से चलेगी, इसलिए हवाई जहाज या कार से कम प्रदूषण फैलाएगी।
कैसे चल रहा है प्रोजेक्ट का काम
इस प्रोजेक्ट को नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) चला रहा है, जो 2016 में इसी के लिए बनाया गया था। जापान की एजेंसी जेआईसीए ने बहुत कम ब्याज पर 88,000 करोड़ रुपये का लोन दिया है।
एक आसान उदाहरण से समझिए
इस प्रोजेक्ट की मुश्किलों को एक एक्सप्रेसवे बनाने जैसा समझ सकते हैं। जैसे तेज सड़क बनाने के लिए बिना मोड़ वाली सीधी जमीन चाहिए और घनी बस्तियों से गुजरना महंगा पड़ता है, वैसे ही बुलेट ट्रेन के लिए सटीक जमीन मिलना बड़ा काम है। इससे समय और पैसा दोनों बढ़ जाते हैं।
यह प्रोजेक्ट भारत के लिए एक सपना है, जो जल्दी पूरा होने से देश की रेल व्यवस्था को नई ऊंचाई देगा।