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लाल सागर में समुद्री तल के नीचे बिछी महत्वपूर्ण इंटरनेट केबलों के कटने से भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व के कई देशों में इंटरनेट सेवाओं में भारी व्यवधान उत्पन्न हो गया है। यह घटना 7 सितंबर 2025 को सामने आई, जिसके कारण इंटरनेट की गति धीमी हो गई और कनेक्टिविटी में देरी बढ़ गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुनिया के लगभग 17% इंटरनेट डेटा ट्रैफिक को प्रभावित करने वाला मार्ग है, जो यूरोप को एशिया और अफ्रीका से जोड़ता है।
क्या हुआ?
- प्रभावित केबलें: मुख्य रूप से दो केबल सिस्टम प्रभावित हुए हैं – SMW4 (साउथ ईस्ट एशिया-मिडिल ईस्ट-वेस्टर्न यूरोप 4) और IMEWE (इंडिया-मिडिल ईस्ट-वेस्टर्न यूरोप)। ये केबलें सऊदी अरब के जेद्दाह के पास लाल सागर में कट गईं।
- कारण: अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि किसी जहाज के एंकर या ड्रैगिंग से क्षति हुई हो सकती है। हालांकि, क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण जानबूझकर हमले की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि हूतियों ने इससे इनकार किया है। फरवरी 2024 में भी इसी तरह की घटना हुई थी।
- प्रभाव: इंटरनेट मॉनिटरिंग संगठन नेटब्लॉक्स ने पुष्टि की कि भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और अन्य अफ्रीकी-अफ्रीकी देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कम हो गई। यूएई में एतिसालात और डू नेटवर्क्स पर धीमी स्पीड की शिकायतें आईं। माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने एज़्योर क्लाउड सर्विसेज पर मिडिल ईस्ट ट्रैफिक में लेटेंसी (देरी) की चेतावनी दी।
भारत पर प्रभाव
भारत में इंटरनेट सेवाओं में मंदी देखी गई, खासकर अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक पर। टाटा कम्युनिकेशंस द्वारा संचालित SMW4 केबल भारत के लिए महत्वपूर्ण है, जो मुंबई, चेन्नई, कोचीन आदि में लैंडिंग स्टेशनों से जुड़ी है। भारत में लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबलें हैं, जो वैश्विक कनेक्टिविटी का आधार हैं। इस व्यवधान से क्लाउड सर्विसेज, ऑनलाइन बिजनेस और सामान्य यूजर्स प्रभावित हुए। पाकिस्तान टेलीकॉम ने भी पीक आवर्स में सेवाओं पर असर की चेतावनी दी।
एशिया और मध्य पूर्व में विस्तृत प्रभाव
- एशिया: भारत और पाकिस्तान के अलावा, दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में धीमी स्पीड और अंतराल आई। यह केबलें एशिया को यूरोप से जोड़ती हैं, इसलिए डेटा ट्रैफिक रीरूट होने से लेटेंसी बढ़ गई।
- मध्य पूर्व: सऊदी अरब, UAE, कुवैत में सेवाएं बाधित। फाल्कन GCX केबल भी प्रभावित हुई, जो कुवैत को प्रभावित कर रही है।
- वैश्विक प्रभाव: कम से कम 10 देशों में असर, जिसमें अफ्रीका के कुछ हिस्से भी शामिल। माइक्रोसॉफ्ट जैसे टेक दिग्गजों की सेवाएं प्रभावित हुईं, लेकिन यूएस और यूरोप में सीधा असर कम।
- मरम्मत: मरम्मत में सप्ताह लग सकते हैं, क्योंकि लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों के कारण जोखिम है। ट्रैफिक को वैकल्पिक रूट्स पर डायवर्ट किया जा रहा है, लेकिन इससे गति प्रभावित रहती है।
पृष्ठभूमि
समुद्री केबलें वैश्विक इंटरनेट का रीढ़ हैं, जो 99% अंतरराष्ट्रीय डेटा ले जाती हैं। लाल सागर एक महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है, जहां से एशिया-यूरोप का अधिकांश ट्रैफिक गुजरता है। इस तरह की घटनाएं दुर्लभ लेकिन गंभीर होती हैं, और मरम्मत के लिए विशेष जहाजों की जरूरत पड़ती है।
यदि समस्या बनी रहती है, तो भारत सरकार या टेलीकॉम कंपनियां वैकल्पिक कनेक्टिविटी पर जोर दे सकती हैं। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।