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पिछले 25-30 साल से जापान दुनिया का सबसे सस्ता पैसा देने वाला देश बना हुआ है। वहाँ ब्याज दर करीब-करीब 0% रखी गई है। इसका फायदा उठाकर दुनिया भर के बड़े निवेशक और हेज फंड जापान से लगभग मुफ्त में येन उधार लेते थे और उसे अमेरिका, यूरोप, भारत जैसे देशों के शेयर बाजार या बॉन्ड में लगा देते थे। इसे कहते हैं “येन कैरी ट्रेड”। अनुमान है कि इस तरह करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 330 लाख करोड़ रुपये) का पैसा जापान से बाहर निवेश हुआ है – यह भारत की पूरी GDP से भी ज्यादा है!
लेकिन अब खेल पलट रहा है…
1. जापान ने 0% ब्याज की नीति क्यों अपनाई थी?
- 1990 में जापान का शेयर और प्रॉपर्टी बाजार बुरी तरह फूटा था।
- इसके बाद अर्थव्यवस्था ठहर सी गई, जिसे “लॉस्ट डेकेड” कहा जाता है।
- अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने ब्याज दर शून्य के करीब कर दी और सरकारी बॉन्ड खूब खरीदे।
2. जापान का कर्ज़ दुनिया में सबसे ज्यादा
आज जापान सरकार का कर्ज़ GDP का करीब 230% से 260% तक पहुँच चुका है – यानी दुनिया की किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था से कई गुना ज्यादा।
3. 2016 से चल रही थी “यील्ड कर्व कंट्रोल” नीति
बैंक ऑफ जापान 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड को जबरदस्ती 0% के आसपास रखता था। इसके लिए वह खुद अरबों-खरबों के बॉन्ड खरीदता रहा।
4. 2024 में नीति बदली, अब मुसीबत शुरू
- मार्च 2024 में BOJ ने यील्ड कर्व कंट्रोल खत्म कर दिया।
- अब बॉन्ड की यील्ड अपने आप बढ़ने लगी है – पिछले 17-18 साल का सबसे ऊँचा स्तर छू लिया।
- जापान की बड़ी बीमा कंपनियाँ और पेंशन फंड भी सरकारी बॉन्ड बेचने लगे हैं क्योंकि उनको डर है कि जापान कर्ज नहीं चुका पाएगा।
- यील्ड बढ़ी ⇒ सरकार को कर्ज लेना महंगा पड़ा ⇒ कर्ज और बढ़ा ⇒ डर और बढ़ा ⇒ और बिकवाली ⇒ यील्ड and बढ़ी… यह एक खतरनाक चक्र बन गया है।
5. असली खतरा: येन कैरी ट्रेड का टूटना (Unwinding)
जब जापान में ब्याज बढ़ेगा या येन मजबूत होगा:
- विदेश में लगाया गया पैसा अब फायदे की जगह नुकसान देने लगेगा।
- बड़े-बड़े निवेशक जल्दी-जल्दी विदेशी शेयर और बॉन्ड बेचकर पैसा वापस जापान ले जाएँगे।
- नतीजा → अमेरिका, यूरोप, भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजार और बॉन्ड यील्ड में भयंकर बिकवाली।
- 2008 जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइस का खतरा!
विशेषज्ञों की चेतावनी
कई बड़े अर्थशास्त्री और मार्केट एनालिस्ट कह रहे हैं –
“अगर जापान छींकेगा तो पूरी दुनिया को भयंकर जुकाम हो जाएगा!”
क्या किया जा सकता है?
- बैंक ऑफ जापान को बहुत धीरे-धीरे बॉन्ड खरीद कम करनी होगी।
- जापानी सरकार को नया कर्ज और फिस्कल स्टिमुलस पैकेज पर ब्रेक लगाना होगा।
- नहीं तो येन कैरी ट्रेड का अचानक टूटना 2008 से भी बड़ा संकट ला सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर जापान के बॉन्ड मार्केट और यील्ड पर टिकी हुई है। अगर अगले कुछ महीनों में 10 साल के जापानी बॉन्ड की यील्ड 1.5-2% के पार चली गई और येन तेजी से मजबूत हुआ, तो ग्लोबल मार्केट में भूचाल देखने को मिल सकता है।
निवेशक सावधान!
जापान की छोटी सी छींक इस बार पूरी दुनिया को अस्पताल पहुँचा सकती है।