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कतर की राजधानी दोहा में 9 सितंबर को इजराइल द्वारा हमास के शीर्ष नेताओं पर किया गया हमला मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला चुका है। यह हमला दोहा के एक आवासीय इलाके में हुआ, जहां हमास के राजनीतिक नेता कथित तौर पर शांति वार्ताओं के लिए एकत्र थे। इजरायली अधिकारियों ने इसे हमास की कमर तोड़ने की रणनीति का हिस्सा बताया है, लेकिन इससे कतर और अमेरिका की संलिप्तता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हमले का विवरण और उद्देश्य
हमले का मुख्य निशाना हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हया थे, जो गाजा के लिए समूह के प्रमुख और प्रमुख वार्ताकार हैं। हालांकि, हमास ने दावा किया कि अल-हया और अन्य शीर्ष नेता बच निकल गए, जबकि पांच निचले स्तर के सदस्य मारे गए—इनमें अल-हया का बेटा, तीन बॉडीगार्ड और उनके कार्यालय का प्रमुख शामिल हैं। इजरायली सेना ने इसे “सटीक हवाई हमला” करार दिया, जो हमास के राजनीतिक मुख्यालय को निशाना बनाया गया। हमास ने इस घटना को “हत्या का प्रयास” बताते हुए इजराइल पर वार्ता प्रक्रिया को ध्वस्त करने का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि इजराइल अब केवल हिंसा की भाषा समझता है।
इजराइल का स्पष्ट उद्देश्य हमास की नेतृत्व व्यवस्था को नेस्तनाबूद करना था, चाहे वे कहीं भी छिपे हों। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले कतर को चेतावनी दी थी कि वह हमास को पनाह देना बंद करे, वरना परिणाम भुगतेगा। इस हमले से हमास की एकजुटता और सौदेबाजी की क्षमता पर गहरा असर पड़ा है, जिससे भविष्य की मध्यस्थता पर संदेह गहरा गया है।
कतर और अमेरिका की भूमिका पर उठते सवाल
दोहा में हमला अमेरिकी अल उदैद एयरबेस से महज 30-35 किलोमीटर दूर हुआ, जो अमेरिका का मध्य पूर्व में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यह बेस कतरी और अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों, जिसमें THAAD मिसाइल सिस्टम शामिल है, से लैस है। इस निकटता को देखते हुए, कई विश्लेषकों का मानना है कि न कतर को न ही अमेरिका को हमले की पूर्व सूचना नहीं हो सकती। अमेरिका ने हमले के बाद इजराइल की निंदा की, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों में विरोधाभास नजर आया—पहले उन्होंने कहा कि अमेरिका को पहले से जानकारी थी, फिर दावा किया कि वे “बहुत असंतुष्ट” हैं।
कई पर्यवेक्षक इसे “भू-राजनीतिक नाटक” मान रहे हैं, खासकर जब अमेरिका ने हमेशा इजराइल का साथ दिया हो। कतर ने हमले को “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” करार देते हुए कड़ी निंदा की, लेकिन हमले के तुरंत बाद कोई घबराहट या रक्षा तैनाती न दिखाने से सवाल उठे कि क्या यह “मौन सहमति” का मामला था।
कतर की बदलती भूमिका: मध्यस्थ से बोझ तक
पिछले एक दशक से कतर हमास, इजराइल और खाड़ी देशों के बीच अपरिहार्य मध्यस्थ रहा है। दोहा में हमास का राजनीतिक कार्यालय लंबे समय से सक्रिय था, और कतर ने कई दौर की वार्ताओं की मेजबानी की। लेकिन अब हमास को कतर के लिए “बोझ” माना जा रहा है—समूह की वैश्विक और अरब जगत में साख गिर रही है, वार्ताएं रुकी हुई हैं, और हताशा बढ़ रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बदलाव ने कतर को हमले की अनुमति देने के लिए प्रेरित किया, जिससे उसकी मध्यस्थता की विश्वसनीयता दांव पर लग गई।
कतर की संलिप्तता के प्रमुख सिद्धांत
इस घटना ने कई सिद्धांतों को जन्म दिया है:
- मौन सहमति का सिद्धांत: कतर ने चुपके से हमले को हरी झंडी दी हो सकती है। THAAD सिस्टम मौजूद होने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया न देना और शांत सार्वजनिक रुख इसे पुष्ट करता है।
- अचानक गुप्त हमला: इजराइल की मोसाद जैसी एजेंसियों की गुप्त क्षमता (जैसे 2024 में तेहरान हत्या) से कतर को चौंका दिया गया हो। लेकिन एयरबेस की निकटता इसकी संभावना कमजोर करती है।
- बाध्य सहमति या रणनीतिक संकेत: कतर को हमले की जानकारी थी, लेकिन इजरायली दबाव और खाड़ी-अमेरिकी लॉबी के कारण हस्तक्षेप न करने का फैसला लिया। इससे कतर की भू-राजनीतिक छवि बनी रहे।
विश्लेषक कहते हैं कि यदि कतर ने वार्ता को आगे बढ़ाया होता, तो उसकी साख बढ़ती, बजाय अपनी धरती पर हमला सहने के।
हितधारकों की प्रतिक्रियाएं
- कतर: संप्रभुता पर सवाल उठे; निंदा की लेकिन मध्यस्थता जारी रखने का वादा किया।
- इजराइल: अपनी पहुंच का प्रदर्शन; आगे के हमलों का संकेत।
- हमास: नेतृत्व की एकता खतरे में; अन्य देशों पर भरोसा कमजोर।
- अमेरिका: बंधक रिहाई और स्थिरता के लक्ष्य; सैन्य अड्डे की सुरक्षा पर सवाल।
- संयुक्त राष्ट्र: सुरक्षा परिषद ने निंदा की; आपात बैठक बुलाई।
- ईरान, मिस्र, तुर्की: 10 सितंबर से पहले हमास को चेतावनी दी थी; समन्वित साजिश का शक। मिस्र-तुर्की ने दोहा बैठक टालने की सलाह दी थी।
निष्कर्ष: रहस्यमयी साजिश या रणनीतिक चाल?
कोई ठोस सबूत नहीं कि कतर ने सीधे हमले की साजिश रची, लेकिन सिद्धांत इशारा करते हैं कि उसे पूर्व जानकारी या मौन सहमति थी। क्या यह कतर के लिए फायदेमंद साबित होगा? विश्लेषक कहते हैं कि इससे उसकी संप्रभुता और मध्यस्थ भूमिका कमजोर हुई है। मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है, और यह घटना गाजा संघर्ष को नई दिशा दे सकती है। आगे की जांच से ही सच्चाई उजागर होगी।