सरकार ने महंगाई (Inflation) मापने के पुराने तरीके को पूरी तरह अपडेट कर दिया है। अब Consumer Price Index (CPI) का आधार वर्ष 2012 की जगह 2024 हो गया है। इसका मतलब है कि महंगाई के आंकड़े अब लोगों के आज के खर्च के पैटर्न को बेहतर तरीके से दिखाएंगे। जनवरी 2026 के नए आंकड़ों के मुताबिक, भारत की खुदरा महंगाई दर 2.75% रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2% से 6% के टारगेट बैंड में बिल्कुल फिट बैठती है।

क्यों किया गया ये बड़ा बदलाव?
पिछले 12-13 सालों में लोगों का खर्च बहुत बदल गया है। 2012 में लोग ज्यादातर अनाज, सब्जी और बेसिक चीजों पर पैसे खर्च करते थे। लेकिन अब आय बढ़ने के साथ लोग फल, दूध, मीट, स्वास्थ्य, ट्रांसपोर्ट, मनोरंजन और ऑनलाइन सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
सरकार ने Household Consumption Expenditure Survey (HCES) 2023-24 के आधार पर ये बदलाव किए हैं। अब महंगाई बास्केट में 358 आइटम्स शामिल हैं – 308 सामान और 50 सेवाएं। पहली बार ऑनलाइन मार्केट के दाम और OTT सब्सक्रिप्शन (जैसे Netflix, Amazon Prime) को भी इसमें जोड़ा गया है।

उपभोग बास्केट में क्या बदला?
- खाने-पीने की चीजों (Food & Beverages) का वेटेज: पहले 45.86% था, अब घटकर 36.75% रह गया है।
- लोग अब बुनियादी अनाज के बजाय फल, डेयरी, मीट और सेवाओं (ट्रांसपोर्ट, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, हाउसिंग) पर ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं।
- नई सीरीज में 12 डिविजन हैं (पहले 6 थे), जिसमें हाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन का वेटेज बढ़ा है।

ये बदलाव क्यों जरूरी थे?
पुराना बास्केट 2012 का था, जो अब पुराना पड़ चुका था। अब महंगाई के आंकड़े ज्यादा सटीक होंगे, जिससे:
- RBI ब्याज दरें (Interest Rates) सही तरीके से तय कर सकेगा।
- होम लोन की EMI पर असर पड़ेगा।
- सरकार की नीतियां (जैसे सब्सिडी, टैक्स) बेहतर बनेंगी।
