भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर समझौता किया है। इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” या “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील” कहा जा रहा है। यह समझौता दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत और दुनिया के सबसे बड़े एकल बाजार EU को जोड़ता है। इससे करीब 2 अरब लोग और वैश्विक जीडीपी का 25% हिस्सा जुड़ जाएगा।

यह बातचीत 2007 से चल रही थी, लेकिन हाल के वैश्विक हालात, खासकर अमेरिका की तरफ से बढ़ते टैरिफ और संरक्षणवाद की वजह से इसे जल्दी पूरा किया गया।
भारत के लिए क्या फायदे? Benefits for India
- भारत को EU के 27 देशों में सीधी और आसान पहुंच मिलेगी।
- भारत से होने वाले 99% निर्यात पर टैरिफ खत्म या बहुत कम हो जाएगा।
- खास फायदा कपड़ा (textile), चमड़ा, समुद्री उत्पाद, दवाइयां (pharmaceuticals), जेम्स एंड ज्वेलरी और इंजीनियरिंग सामान को होगा।
- आईटी और दवाइयों जैसे क्षेत्रों में नियम और मंजूरी आसान हो जाएगी।
- इससे भारत के निर्यात में बड़ा उछाल आएगा, लाखों नौकरियां बनेगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

- EU को भारत के बड़े और बढ़ते मध्यम वर्ग तक पहुंच मिलेगी, जो प्रीमियम सामान खरीदता है।
- वाइन, स्पिरिट, लग्जरी कारें (जैसे Mercedes, BMW) और मशीनरी पर भारत में टैरिफ कम होगा (110% से घटाकर 40% तक)।
- इससे EU के निर्यात बढ़ेंगे और चीन पर निर्भरता कम होगी।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और भू-राजनीतिक मायने US Reaction and Geopolitical Impact
अमेरिका ने इस डील की आलोचना की है। ट्रंप प्रशासन के लोगों, जैसे ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह डील अप्रत्यक्ष रूप से रूस के युद्ध को फंडिंग दे रही है, क्योंकि भारत से EU डीजल-पेट्रोल खरीदेगा और उसका कच्चा तेल रूस से आता है।
लेकिन यह डील भारत को अमेरिका पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। भारत अब अपने निर्यात बाजारों में विविधता ला सकेगा। साथ ही, भारत और EU दोनों चीन पर अपनी निर्भरता घटा सकेंगे और मजबूत सप्लाई चेन बना सकेंगे।
यह समझौता सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) का भी प्रतीक है। यह दिखाता है कि बहुध्रुवीय दुनिया में देश अमेरिका के दबाव के बिना भी अपने हित साध सकते हैं।
आगे क्या? What’s Next?
समझौते पर कानूनी जांच और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद इसे 2026 में लागू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत का निर्यात $100 बिलियन से ज्यादा बढ़ सकता है और रोजगार में बड़ा इजाफा होगा।
यह डील न सिर्फ भारत-EU के बीच नया व्यापार धुरी बनाएगी, बल्कि वैश्विक व्यापार में नए गठबंधनों की शुरुआत भी करेगी।