नाटो, यानी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन, ने हाल ही में रूसी ड्रोनों द्वारा पोलैंड के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के बाद एक बड़ा कदम उठाया है। इस घटना को नाटो ने “खतरनाक और अस्वीकार्य” बताया है। इसके जवाब में, नाटो ने ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री शुरू किया है, जो यूक्रेन संकट के बाद इसका सबसे मजबूत रक्षात्मक अभियान है। यह अभियान आर्कटिक से लेकर काला सागर और भूमध्य सागर तक नाटो के पूरे पूर्वी हिस्से को कवर करता है।
क्या है ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री?
इस अभियान का मकसद रूस को नाटो की ताकत दिखाकर रोकना और अपने पूर्वी देशों को सुरक्षा का भरोसा देना है। इसमें लड़ाकू विमान, युद्धपोत, मिसाइल रक्षा प्रणालियां और उन्नत रडार जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। खास तौर पर, रूस के सस्ते ड्रोनों से निपटने के लिए ड्रोन-रोधी तकनीक को भी शामिल किया गया है। साथ ही, नाटो की राजधानियों के बीच बेहतर खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था की गई है।
नाटो का महत्व और भूमिका
नाटो एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अपने 32 सदस्य देशों को सामूहिक सुरक्षा प्रदान करना है। नाटो की संधि का अनुच्छेद पांच कहता है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा, और सभी देश मिलकर उसका जवाब देंगे। इस नियम का इस्तेमाल अब तक केवल एक बार हुआ है, जब 2001 में अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमले हुए थे। नाटो न केवल रक्षा करता है, बल्कि दुनिया भर में शांति स्थापना और संकट प्रबंधन जैसे कामों में भी सक्रिय है। इसका मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में है।
ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री क्यों खास है?
यह अभियान नाटो की एकजुटता और ताकत को दर्शाता है। यह रूस के बढ़ते खतरों, खासकर ड्रोन हमलों, से निपटने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल करता है। यह नाटो के अनुच्छेद पांच के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जो सामूहिक रक्षा का आधार है। इसके अलावा, यह अभियान बाल्टिक सेंट्री 2024 से प्रेरित है, जिसे समुद्र के नीचे तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद शुरू किया गया था।
क्या है इसका असर?
ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री नाटो की पूर्वी सीमाओं पर सुरक्षा को और मजबूत करता है। यह रूस को साफ संदेश देता है कि नाटो अपने सदस्य देशों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही, यह गठबंधन की एकता को दर्शाता है, जो आर्कटिक से लेकर भूमध्य सागर तक फैला हुआ है।
यह कदम न केवल नाटो की रणनीतिक ताकत को बढ़ाता है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने और शांति बनाए रखने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है।