Oplus_131072
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या (मर्डर) और हत्या के प्रयास (अटेम्प्ट टू मर्डर) के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भ्रम न केवल कानून के छात्रों, बल्कि कई बार हाई कोर्ट के जजों के बीच भी देखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह गाइडलाइंस छत्तीसगढ़ के एक मामले, मानिक लाल साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य, के आधार पर दीं।
क्या था मामला?
छत्तीसगढ़ में मानिक लाल साहू और तीन अन्य लोगों ने मिलकर एक व्यक्ति के घर में घुसकर उस पर हमला किया। उन्होंने पीड़ित को छत पर घसीटा, उसकी पिटाई की और उसे छत से नीचे फेंक दिया। इस हमले में पीड़ित को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी। वह लगभग 9 महीने तक जीवित रहा, लेकिन नवंबर 2022 में सेप्टिक शॉक, निमोनिया और मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उसकी मृत्यु हो गई। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, ये सभी जटिलताएं उस हमले में लगी चोटों का नतीजा थीं।
कोर्ट में क्या हुआ?
- सेशन कोर्ट: शुरुआती सुनवाई में सेशन कोर्ट ने मानिक लाल साहू को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराया।
- हाई कोर्ट: हाई कोर्ट ने अपील पर इस फैसले को पलट दिया और सजा को धारा 302 (हत्या) से धारा 307 (हत्या का प्रयास) में बदल दिया। हाई कोर्ट का कहना था कि मृत्यु 9 महीने बाद हुई और यह उचित इलाज की कमी के कारण थी, इसलिए चोट और मृत्यु के बीच सीधा संबंध नहीं था।
- सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को गलत ठहराया और कहा कि मृत्यु भले ही देरी से हुई, लेकिन यह हमले में लगी चोटों का ही परिणाम थी। इसलिए, यह हत्या का मामला है, न कि हत्या का प्रयास।
सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइंस
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या और हत्या के प्रयास के बीच अंतर को आसान बनाने के लिए ये नियम बनाए:
- चोट और मृत्यु का संबंध: अगर मृत्यु चोटों से होने वाली जटिलताओं (जैसे सेप्टिसीमिया) के कारण हुई और ये जटिलताएं चोटों का स्वाभाविक परिणाम थीं, तो देरी से हुई मृत्यु को भी हत्या माना जाएगा।
- इरादा महत्वपूर्ण: अगर चोटें जानबूझकर मृत्यु के इरादे से लगाई गई थीं और वे मृत्यु का कारण बन सकती थीं, तो यह हत्या होगी, भले ही मृत्यु बाद में हुई हो।
- इलाज की कमी कोई बहाना नहीं: यह मायने नहीं रखता कि उचित इलाज से मृत्यु को रोका जा सकता था। अगर चोटें मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त थीं, तो अभियुक्त दोषी होगा।
- चोटों का संयुक्त प्रभाव: अगर कई चोटें मिलकर मृत्यु का कारण बनीं, तो भी यह हत्या मानी जाएगी, भले ही कोई एक चोट अपने आप में घातक न हो।
- मृत्यु की संभावना: अगर चोटों से मृत्यु लगभग निश्चित थी, तो यह हत्या होगी, भले ही अपराधी को इसकी जानकारी न हो।
- कोर्ट का ध्यान: कोर्ट को यह देखना चाहिए कि चोटें मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त थीं या नहीं, न कि पीड़ित कितने समय तक जीवित रहा।
- जीवित रहने का समय: पीड़ित के लंबे समय तक जीवित रहने से अपराधी की हत्या की जिम्मेदारी कम नहीं होती।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने गलती से सजा को हत्या से हत्या के प्रयास में बदला। कोर्ट ने पाया कि हमले की गंभीरता, जानबूझकर किया गया कार्य और चोटों का प्रकार साफ तौर पर हत्या की ओर इशारा करते हैं। इसलिए, मानिक लाल साहू को हत्या का दोषी ठहराया गया।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
यह फैसला न केवल कानूनी भ्रम को दूर करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सही सजा मिले। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस भविष्य में ऐसे मामलों में कोर्ट्स के लिए रास्ता साफ करेंगी।