अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए बड़े पैमाने पर टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध घोषित कर दिया। ये टैरिफ ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए थे।
कोर्ट का कहना है कि इस कानून में राष्ट्रपति को इमरजेंसी में विदेशी संपत्ति को रेगुलेट करने की शक्ति है, लेकिन टैरिफ लगाने (टैक्स बढ़ाने) का स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया। टैरिफ लगाने का मुख्य अधिकार अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है। यह फैसला अमेरिका में शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) को मजबूत करता है और राष्ट्रपति की अतिरिक्त शक्ति पर रोक लगाता है।
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ट्रंप के पुराने टैरिफ क्यों लगाए गए थे? ट्रंप ने इन टैरिफ का इस्तेमाल अवैध ड्रग्स (जैसे फेंटानिल) के आने और अन्य देशों द्वारा अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार (Unfair Trade Practices) रोकने के लिए किया था। इनमें मेक्सिको, कनाडा, चीन और भारत जैसे देशों पर 10% से 25% तक के टैरिफ शामिल थे। ट्रंप का दावा था कि इससे अमेरिकी नौकरियां और अर्थव्यवस्था सुरक्षित होगी।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे टैरिफ का असली बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ता है, क्योंकि आयातित सामान महंगा हो जाता है।

फैसले के बड़े प्रभाव
- अमेरिकी सरकार ने इन टैरिफ से $130 से $175 बिलियन तक की कमाई की थी। अब कंपनियां और आयातक रिफंड की मांग कर सकते हैं, हालांकि यह प्रक्रिया लंबी चल सकती है।
- चीन, भारत जैसे देशों के निर्यातकों और अमेरिकी व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।
- वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था को महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया और नया टैरिफ फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कुछ जजों को “फूल्स”, “लैप डॉग्स” और “डिसग्रेस” तक कहा। उन्होंने कहा कि यह फैसला “गहरा निराशाजनक” है।
फिर ट्रंप ने तुरंत 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल कर पूरी दुनिया पर 10% का नया टैरिफ लगा दिया। यह कानून राष्ट्रपति को बड़े व्यापार असंतुलन के मामले में अधिकतम 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, लेकिन केवल 150 दिनों के लिए। उसके बाद कांग्रेस को फैसला लेना होगा।
ट्रंप ने कहा कि वे अमेरिकी कामगारों, किसानों और उद्योगों की रक्षा के लिए लड़ते रहेंगे। यह कदम सुप्रीम कोर्ट और ट्रंप के बीच सीधा टकराव दिखाता है।

भारत पर क्या असर?
भारत जैसे देशों के निर्यातकों को पहले राहत मिली थी, लेकिन नए 10% टैरिफ से फिर चुनौतियां आ सकती हैं। हालांकि यह अस्थायी है, और आगे क्या होता है यह देखना बाकी है।
यह घटना दिखाती है कि अमेरिका में व्यापार नीति कितनी विवादास्पद हो सकती है। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति जारी है, लेकिन अब कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और तेज हो गई है।