मारुति से मारुति सुजुकी फिर मारुति सुजुकी से सुजुकी बनाने की दिलचस्प कहानी
मारुति और सुजुकी की दोस्ती की कहानी एक दिलचस्प सफर है, जो भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बदलने वाली साझेदारी की शुरुआत से जुड़ी है। यह कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है, जब भारत में एक सस्ती और आम आदमी की कार बनाने का सपना देखा गया। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
शुरुआत: मारुति का जन्म
1970 के दशक में, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने “पीपल्स कार” बनाने का विचार रखा। उन्होंने 1971 में मारुति मोटर्स लिमिटेड की स्थापना की, जिसका उद्देश्य एक छोटी, किफायती कार बनाना था। लेकिन संजय गांधी की 1980 में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई, और कंपनी घाटे में चली गई। इसके बाद, भारत सरकार ने इसे अपने कब्जे में लिया और फरवरी 1981 में मारुति उद्योग लिमिटेड (MUL) के रूप में इसे पुनर्गठित किया
यहाँ संजय गांधी की एक पुरानी तस्वीर है, जहाँ वे अपनी प्रोटोटाइप कार के साथ दिख रहे हैं:
सुजुकी का प्रवेश: दोस्ती की नींव
1981 में, भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों से साझेदारी की तलाश शुरू की। कई कंपनियों से बात हुई, लेकिन अप्रैल 1982 में जापान की सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के साथ बातचीत शुरू हुई। सुजुकी के चेयरमैन ओसामु सुजुकी ने इस मौके को देखा और अक्टूबर 1982 में एक जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए। शुरू में सुजुकी ने 26% हिस्सेदारी ली, जबकि भारत सरकार के पास बहुमत था। यह सहमति थी कि पांच साल बाद सुजुकी अपनी हिस्सेदारी 40% तक बढ़ाएगी
ओसामु सुजुकी, जिन्होंने इस साझेदारी को संभव बनाया:

यह साझेदारी भारत में पहली बड़ी विदेशी निवेश वाली ऑटो कंपनी थी, और सुजुकी जापान की पहली कंपनी थी जो भारत में निवेश कर रही थी
पहली सफलता: मारुति 800 का लॉन्च
इस दोस्ती का पहला फल 1983 में आया, जब मारुति 800 लॉन्च हुई। यह कार सुजुकी के SS80 मॉडल पर आधारित थी और भारत की सड़कों पर क्रांति ला दी। यह सस्ती, ईंधन-कुशल और आसानी से उपलब्ध थी, जिसने मध्यम वर्ग को कार मालिक बनने का सपना साकार किया। पहले दो सालों में, 40,000 कारें आयात की गईं, और धीरे-धीरे स्थानीय उत्पादन बढ़ाया गया। 1991 तक, कारों में 65% हिस्सा भारतीय पार्ट्स का था
मारुति 800 की एक क्लासिक तस्वीर, इसके पहले मालिकों के साथ:

विकास और मजबूती: हिस्सेदारी का बढ़ना
1987 में सुजुकी ने अपनी हिस्सेदारी 40% कर ली, और 1992 में 50% तक पहुंचाई। 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण ने इस साझेदारी को और मजबूत किया। 2002 में, सरकार ने अपनी हिस्सेदारी सुजुकी को बेच दी, और कंपनी का नाम मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड हो गया। 2013 तक सुजुकी की हिस्सेदारी 56.21% हो गई।.
कंपनी ने गुरुग्राम (पहले गुड़गांव) में अपना पहला प्लांट स्थापित किया, जो आज भी उत्पादन का केंद्र है।
मारुति सुजुकी के गुरुग्राम फैक्ट्री की एक झलक:

आज की स्थिति: एक मजबूत दोस्ती
आज मारुति सुजुकी भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है, जो बाजार का 40-50% हिस्सा रखती है। इस साझेदारी ने न केवल भारत में ऑटो इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया, बल्कि सुजुकी को वैश्विक बाजार में मजबूती दी। कंपनी ने कई मॉडल लॉन्च किए जैसे जेन, वैगनआर, स्विफ्ट, और अब इलेक्ट्रिक वाहन पर फोकस कर रही है। यह दोस्ती तकनीक, इनोवेशन और विश्वास पर आधारित है, जो दशकों से चल रही है।
मारुति सुजुकी का लोगो, जो इस साझेदारी का प्रतीक है:

यह कहानी दिखाती है कि कैसे दो अलग-अलग देशों की कंपनियां मिलकर एक सफल साम्राज्य बना सकती हैं