ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने ईरान पर संभावित हमले के लिए ब्रिटेन के एयर बेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

यह फैसला दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ‘विशेष संबंधों’ में दरार डाल सकता है, क्योंकि पहले ब्रिटेन हमेशा अमेरिका के सैन्य अभियानों में साथ देता रहा है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता, तो अगले 10 दिनों में हमला हो सकता है। लेकिन स्टारमर ने कहा कि बिना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के ऐसा हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। अगर ब्रिटेन अपने बेस इस्तेमाल करने की इजाजत देता, तो वह भी इस हमले का हिस्सा माना जाता।
मुख्य बिंदु: क्या हुआ और क्यों?
- कौन से बेस शामिल हैं? अमेरिका मुख्य रूप से दो ब्रिटिश बेस इस्तेमाल करना चाहता था। पहला है इंग्लैंड का आरएएफ फेयरफोर्ड, जहां लंबी दूरी के बॉम्बर विमान और ईंधन भरने की सुविधा है। दूसरा है हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक है।

यह द्वीप ब्रिटेन का विदेशी क्षेत्र है, लेकिन अमेरिका यहां अपने विमान रखता है।
- अनुमति क्यों जरूरी? दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते हैं, लेकिन हमले के लिए ब्रिटेन की स्पष्ट मंजूरी जरूरी है। बिना इसके अमेरिका इन बेस से ईरान पर हमला नहीं कर सकता।
- स्टारमर ने मना क्यों किया?
- कानूनी समस्या: ब्रिटिश वकीलों का कहना है कि बिना यूएन की अनुमति के हमला गैरकानूनी होगा। स्टारमर नहीं चाहते कि ब्रिटेन इस विवाद में फंसे।
- स्वतंत्र नीति: स्टारमर ब्रिटेन की विदेश नीति को ज्यादा स्वतंत्र बनाना चाहते हैं। वे हर मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं देना चाहते, बल्कि ब्रिटेन के हितों को पहले रखना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, पिछले साल अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, तब भी ब्रिटेन ने सीधा साथ नहीं दिया था।
- डिएगो गार्सिया का विवाद: यह द्वीप मॉरीशस को सौंपने की योजना पर ट्रंप नाराज हैं। ब्रिटेन इसे 100 साल की लीज पर रखना चाहता है, लेकिन ट्रंप इसे ‘बड़ी गलती’ बता रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि अगर ईरान समझौता नहीं करता, तो डिएगो गार्सिया की जरूरत पड़ेगी।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से बढ़ा रहा है और यूरेनियम को ज्यादा शुद्ध कर रहा है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान ‘अस्थिर और खतरनाक’ है और हमला जरूरी हो सकता है।

अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है:
- 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान जैसे एफ-22, एफ-35 और एफ-16 तैनात किए गए हैं।
- दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर, यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड, क्षेत्र में भेजे गए हैं। यह दुनिया का सबसे आधुनिक कैरियर है।
ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ, तो वह जवाब देगा। यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व की शांति को खतरे में डाल सकती है।
क्या होगा आगे?
यह फैसला ब्रिटेन और अमेरिका के रिश्तों में तनाव पैदा कर रहा है। ट्रंप और स्टारमर के बीच मंगलवार को फोन पर बात हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘विशेष संबंध’ में एक दुर्लभ बदलाव है, लेकिन पूरी तरह टूट नहीं सकता। स्टारमर की सरकार ब्रिटेन की संसद में भी इस मुद्दे पर बहस की मांग हो रही है। अगर तनाव बढ़ा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान तेल निर्यात का बड़ा केंद्र है।