बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति की भावनाएं ऊपर-नीचे होती रहती हैं, जैसे रोलर कोस्टर की सवारी। कभी बहुत ज्यादा खुशी महसूस होती है, तो कभी गहरी उदासी छा जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी लाखों लोगों को प्रभावित करती है और इसका सही समय पर पता लगाना जरूरी है।
लक्षण और व्यवहार: कैसे पहचानें इस बीमारी को?
बाइपोलर डिसऑर्डर का पता लगाना आसान नहीं होता, क्योंकि लोग इसे कभी-कभी स्कीज़ोफ्रीनिया जैसी दूसरी बीमारियों से जोड़कर देखते हैं। इसके मुख्य लक्षणों में नींद न आना, बहुत ज्यादा एनर्जी महसूस करना, बिना सोचे पैसे उड़ाना और बहुत तेज बोलना शामिल है। जब मैनिया की स्थिति आती है, तो व्यक्ति एक साथ कई काम करने लगता है और उसके दिमाग में बड़े-बड़े आईडिया घूमने लगते हैं। अगर आपको या आपके किसी जानने वाले में ऐसे बदलाव दिखें, तो डॉक्टर से बात करें।

निजी जीवन पर असर: रिश्ते और करियर में परेशानी
यह बीमारी सिर्फ दिमाग को ही नहीं, बल्कि रिश्तों और नौकरी को भी बर्बाद कर सकती है। एक महिला एमिलिया ने बताया कि उन्होंने अपने भाई से कड़वी बातें कह दीं, जिससे उनके रिश्ते खराब हो गए। एक बार तो वह चलती कार से कूद गईं और अपनी बेटी के जन्म के बाद मैनिया की वजह से बच्चे से दूर रहना पड़ा। ऐसे में परिवार का साथ बहुत जरूरी होता है।
बाइपोलर 1 और 2 में फर्क: क्या अंतर है?
बाइपोलर डिसऑर्डर दो मुख्य प्रकार के होते हैं। बाइपोलर 1 में व्यक्ति की हालत इतनी खराब हो जाती है कि वह हकीकत से दूर हो जाता है, जिसे साइकोसिस कहते हैं। इसमें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, बाइपोलर 2 में मैनिया इतना तेज नहीं होता, लेकिन चिंता और उदासी ज्यादा रहती है। दोनों में इलाज अलग-अलग हो सकता है।

इलाज और प्रबंधन: कैसे कंट्रोल करें?
इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण है। साइकैट्रिस्ट दवाएं जैसे लैमोट्रीजीन और क्वेटियापाइन देते हैं, साथ में थेरेपी और काउंसलिंग भी होती है। एमिलिया ने साझा किया कि रोज 8 घंटे सोना, तनाव कम करने के लिए काम दूसरों को देना और दोस्तों के साथ बाहर घूमना उनकी मदद करता है। याद रखें, सही इलाज से यह बीमारी मैनेज की जा सकती है।
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समाज में कलंक: लोगों की सोच बदलनी जरूरी
बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़ा एक बड़ा कलंक है, जिसकी वजह से लोग इससे जूझते हुए अकेला महसूस करते हैं। समाज को समझना चाहिए कि यह एक बीमारी है, न कि कमजोरी। दोस्तों और परिवार का सपोर्ट सिस्टम बनाकर इससे बाहर निकला जा सकता है।
संक्षेप में, बाइपोलर डिसऑर्डर को दवाओं, थेरेपी और मजबूत सपोर्ट से हैंडल किया जा सकता है। अगर आपको लगता है कि आपको या किसी को मदद की जरूरत है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।