भारत, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, अपनी विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ 1.4 अरब से अधिक लोग रहते हैं, जो 22 आधिकारिक भाषाएँ बोलते हैं और सैकड़ों बोलियों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, 2,000 से अधिक जातीय समूह और कई धर्म यहाँ एक साथ रहते हैं। यह विविधता भारत के लोकतंत्र को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करती है। यह एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जहाँ अलग-अलग संस्कृतियाँ, परंपराएँ और विचार एक साथ मिलकर देश को आगे ले जाते हैं।
विविधता: लोकतंत्र की ताकत
भारत की विविधता न केवल इसकी पहचान है, बल्कि यह लोकतंत्र का आधार भी है। यहाँ के लोग अलग-अलग धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं को अपनाते हुए भी एकजुट रहते हैं। उदाहरण के लिए, केरल में ओणम, बंगाल में दुर्गा पूजा और गुजरात में गरबा जैसे त्यौहार सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं। यह एकता भारत के संविधान में भी दिखती है, जो धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और भाषाई विविधता को बढ़ावा देता है।
विविधता सामाजिक संवाद को प्रोत्साहित करती है, सहिष्णुता को बढ़ाती है और लोकतंत्र को लचीला बनाती है। यह भारत को दुनिया के सामने एक मिसाल के रूप में पेश करती है, जहाँ विविधता और एकता एक साथ फल-फूल सकती हैं।
कथकली: समावेशिता का प्रतीक
केरल की 17वीं सदी की शास्त्रीय नृत्य कला कथकली इस विविधता का जीवंत उदाहरण है। हाल ही में, 16 साल की सबरी ने कृष्ण के किरदार में कथकली का प्रदर्शन कर 95 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा, जिसमें पहले केवल पुरुष ही हिस्सा लेते थे। यह कदम न केवल लैंगिक समानता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत की कला और संस्कृति समय के साथ और समावेशी हो रही है। कथकली जैसे कला रूप सामाजिक और धार्मिक मतभेदों को मिटाने का काम करते हैं और लोगों को एकजुट करते हैं।
दुनिया से सबक: विविधता की अनदेखी का नुकसान
कई देश, जिन्हें भारत के साथ आजादी मिली, विविधता को अपनाने में विफल रहे और उनके लोकतंत्र कमजोर पड़ गए। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में जातीय समूहों को एकजुट करने में नाकामी के कारण सैन्य तख्तापलट हुए और बांग्लादेश का उदय हुआ। वहीं, मिस्र में अल्पसंख्यकों की अनदेखी और अधिनायकवाद के कारण अशांति फैली। ये उदाहरण बताते हैं कि अगर विविधता को दबाया जाए या उसे सही ढंग से प्रबंधित न किया जाए, तो लोकतंत्र कमजोर हो जाता है।
विविधता और लोकतंत्र का गहरा रिश्ता
भारत में विविधता लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करती है। यह लोगों को एक-दूसरे से संवाद करने और समझौता करने का मौका देती है। यह सुनिश्चित करती है कि हर समुदाय, लिंग और कमजोर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिले। साथ ही, यह किसी भी तरह के तानाशाही शासन के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करती है।
भारत की संस्कृति, कला, त्यौहार और भाषाएँ न केवल इसकी विविधता को दर्शाती हैं, बल्कि इसे एकजुट करने का काम भी करती हैं। कथकली जैसे कला रूप और ओणम जैसे त्यौहार सामाजिक मतभेदों को मिटाने वाले पुल की तरह हैं। भारत का लोकतंत्र इस विविधता के कारण न केवल जीवित है, बल्कि यह दुनिया के लिए एक प्रेरणा भी है।