वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को अमेरिकी सेना द्वारा पकड़ लिए जाने के बाद अब कई पुराने आरोपों की सच्चाई सामने आ रही है। अमेरिका ने लंबे समय से मदुरो पर ड्रग तस्करी और ‘कार्टेल ऑफ द सन’ नाम के संगठन का मुखिया होने का इल्जाम लगाया था। लेकिन हालिया कोर्ट दस्तावेजों में अमेरिकी न्याय विभाग ने खुद माना कि यह ‘कार्टेल’ कोई वास्तविक संगठित अपराधी गिरोह नहीं था। यह तो सिर्फ 1990 के दशक में वेनेजुएला के पत्रकारों द्वारा बनाया गया एक मुहावरा (स्लैंग) था, जो भ्रष्ट अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होता था।
- ‘कार्टेल ऑफ द सन’ सिर्फ एक मुहावरा था, कोई असली संगठन नहीं
- ट्रंप का प्लान: अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल पर कब्जा करेंगी
- दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार को हथियाने की कोशिश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला में कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य वहां के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण करना है। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं – लगभग 303 अरब बैरल। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वहां अरबों डॉलर निवेश करके पुरानी ढांचागत सुविधाओं को ठीक करेंगी और उत्पादन बढ़ाएंगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वेनेजुएला से 30 से 50 मिलियन बैरल तेल अमेरिका को सौंपा जाएगा।

हालांकि तेल निकालना इतना आसान नहीं है। वेनेजुएला का तेल भारी क्रूड है, जिसे प्रोसेस करने के लिए विशेष रिफाइनरियां और भारी निवेश की जरूरत पड़ती है। दशकों की अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वहां की तेल निकासी और रिफाइनिंग की क्षमता काफी कम हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन को पुराने स्तर पर लाने में अरबों डॉलर और कई साल लग सकते हैं।

कई लोग इसे अमेरिका का नया साम्राज्यवाद बता रहे हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर भी कब्जे की बात की है और अन्य देशों को चेतावनी दी है। लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं।
सरल उदाहरण से समझें: यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई पड़ोसी ‘सांप मारने’ के बहाने आपके बगीचे में घुस आए, लेकिन असल में वहां के फल के पेड़ों पर नजर गड़ा दे। सांप तो सिर्फ बहाना था, असली मकसद फल छीनना था!

यह मामला अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता की अनदेखी का उदाहरण बन रहा है। दुनिया भर में इस पर बहस छिड़ी हुई है कि क्या तेल के लिए ऐसे कदम जायज हैं?