आज की तेज़ बदलती दुनिया में शिक्षा किसी देश की सबसे बड़ी ताकत होती है। कई देशों ने अपनी शिक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाया है कि वे दुनिया में सबसे आगे हैं। आइए देखें कि जापान, सिंगापुर, चीन, कनाडा और फिनलैंड जैसी देशों की शिक्षा व्यवस्था क्या खास है और भारत के लिए क्या सबक हैं।
1. जापान: टीम वर्क और जिम्मेदारी की सीख
Japan: Lessons in Teamwork and Responsibility
जापान ने बहुत पहले, साल 1872 में ही शिक्षा को सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दिया था। वहीं भारत में यह 2011 में हुआ। जापान की स्कूलों में पढ़ाई सिर्फ किताबी ज्ञान पर नहीं, बल्कि टीम वर्क, देशभक्ति और जिम्मेदारी पर ज्यादा जोर देती है।
यहाँ स्कूलों में कोई चपरासी या सफाई वाला नहीं होता। बच्चे खुद अपनी कक्षा, टॉयलेट और स्कूल की सफाई करते हैं। इससे उनमें जिम्मेदारी और सम्मान की भावना पैदा होती है।
इसी शिक्षा की वजह से जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु बमों की तबाही झेलने के बाद भी तेजी से तरक्की की और आज टेक्नोलॉजी में दुनिया का बादशाह है।

2. सिंगापुर: हर व्यक्ति को बराबर मौका
Singapore: Equal Quality Education for All
1965 में आजादी मिलने पर सिंगापुर के पास न कोई प्राकृतिक संसाधन थे, न जमीन ज्यादा। लेकिन उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
यहाँ की खास बात यह है कि एक इंजीनियर और एक सफाई कर्मचारी, दोनों को ही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और ट्रेनिंग मिलती है। कोई भेदभाव नहीं।
इस मॉडल की वजह से सिंगापुर आज दुनिया के सबसे अमीर और सफल देशों में शुमार है।

3. चीन: मेहनत पर सबसे ज्यादा जोर
China: Focus on Hard Work
चीन की शिक्षा का मुख्य लक्ष्य हर बच्चे को कड़ी मेहनत करना सिखाना है। रिपोर्ट कार्ड में सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि बच्चे ने कितनी मेहनत की, यह भी लिखा जाता है।
माता-पिता को स्कूल से दिन में 10 से ज्यादा मैसेज आते हैं, जिसमें बच्चे की पढ़ाई और मेहनत की पूरी जानकारी होती है।
बच्चे सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भागते, बल्कि अपनी मेहनत से बाजार में आगे बढ़ने की सोचते हैं।

4. कनाडा: विविधता को ताकत बनाना
Canada: Embracing Diversity and Leadership
कनाडा की शिक्षा व्यवस्था में अलग-अलग भाषा, संस्कृति और पृष्ठभूमि वाले बच्चों की विविधता को समस्या नहीं, बल्कि मौका माना जाता है।
वहाँ संसद खुद शिक्षा के लक्ष्य तय करती है। सबसे खास बात – लीडरशिप, प्रेजेंटेशन स्किल्स और कम्युनिकेशन मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं, सिर्फ एक्स्ट्रा एक्टिविटी नहीं।

5. फिनलैंड: शिक्षकों पर पूरा भरोसा
Finland: Trust in Teachers and Quality Focus
फिनलैंड दशकों से दुनिया की नंबर 1 शिक्षा व्यवस्था वाला देश है। वहाँ 7 साल की उम्र तक कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं होती – बच्चे सिर्फ खेलते और विकसित होते हैं।
स्कूल इंस्पेक्टरों के पद खत्म कर दिए गए और वह पैसा शिक्षकों की ट्रेनिंग पर लगाया जाता है। फिनलैंड में शिक्षक बनना बहुत मुश्किल है – यहाँ शिक्षक बनना IIT में दाखिले से भी कठिन माना जाता है।

भारत के लिए बड़ा सवाल और निष्कर्ष
Big Question for India and Conclusion
ये देश बताते हैं कि अच्छी शिक्षा से देश कितनी तेजी से आगे बढ़ सकता है। भारत में भी शिक्षा को बदलने की जरूरत है।
क्या हम अपने शिक्षकों पर भरोसा कर सकते हैं? क्या हम प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बीच की असमानता खत्म कर सकते हैं?
लेखक का मानना है – देश तभी बदलेगा जब शिक्षा बदलेगी। इसके लिए हमें ऐसे नेता चुनने होंगे जो शिक्षा को सबसे ऊपर रखें।